नीति वाक्य माला | Neetivakyamala

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Book Image : नीति वाक्य माला  - Neetivakyamala
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नीतिवाक्यम/ला । [९मिलनेकी समावना हो, अथवा उनके परिचयसे प्रगट द्रव्य रम -होता हो, या कि्ती भी प्रकारका लाभ होता हो तो शायद ही ऐसा कोई मनुष्य होगा जो परोपकारका कार्य न करे। सचे सहृदय, ओर भविश्चय उदार पुरुष ही इतनी अधिक नेतिक उच्चता रखते दें ` कि भिस उच्चताके ही कारण वे किसी भी प्रकारकी कामना, या इच्छाके विन्ा केवल कतेव्यपालन करनेके लिये ही उत्तम कार्यपरोपकार करते हैं | लीली ई० ए०० वेरीयह तो सर्वथा सत्य कि त्तम का, रमकी शक्ति औरउप्ता विस्तार मनुष्यके स्वकीय श्रेष्ठ चारित्र पर निभर होता दे।स्मरण रखना चाहिये कि वचनकोशछतासे, दिखाऊ बुद्धिविक्रा- शसे, और चालाकीसे चारित्रके दोष छिपे नहीं रहते हैं । पेजेंट ।हमको किस मार्गेपर चहुना चाहिये यह হন লাল हैं ।हमारे निर्मल हृदयपट पर तेरी आज्ञाये चित्रित हैं । परंतु हे' परमात्मा ! इप्तसे भी अधिक जआाशिष दे, हमें हमारे ज्ञानके अनु-सार काये करनेक्षी इच्छा दे, हमारी इच्छा भनुप्तार कार्य करनेकी- प्ररु शक्ति दे जर कषायं करनेक्े किमि फोडाद नेप रंगीन सुखदउद्देश दे । तेरी भावनासे हमें ज्ञान तो प्राप्त हुआ है परंतु हेप्रभो | उपडुक्त अन्य जपृणतायें हमको बहुत ही खटकती हैं।- ओर वह तुझसे मांगते हैं। जान हिकं वाररसप्तारकी उत्तम वस्तुभोंका थोडा बहुत उपमोग हमने स्वर्थे “किया है या नहीं ? यह प्रश्न हमारे लिये सौ वर्षके बाद নিভু




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