मित्र बनाने की कला | Mitra Banane Ki Kala

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : मित्र बनाने की कला  - Mitra Banane Ki Kala

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about लेखराज सिंह - Lekhraj Singh

Add Infomation AboutLekhraj Singh

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
१६ मित्र बनाने की कला पहने, वह उसके बदंन पर फबती हो तथा जिस काम पर व ह लगा हो, वह उसके अनुकूल हो । स्त्री-पुरुष दोनों ही समान रूप में हँसता हुआ चेहरा बनाए रखने की आदत डाल सकते हैं । वे मुँह की रुखाई-भरी रेखाओं ओर झुर्रियों को दया की आदत अपने में पैदा करके तथा गुस्सा आने पर उसे रोककर मिटा सकते हैं । गिलवेल के बुद्धिमान, खुशदिलि, बूढ़े व्यक्ति लाडे बैडन पावेल ने एक बार लिखा था, “साधारण जिन्दगी में कठिनाइयाँ ओर निराशा पैदा होना स्वाभाविक चीज है । किन्तु यदि आप इन पर मुर्रा सके यर अनिवार्य सममकर इन्द स्वीकार कर सकं, तो शीघ्र ही ये खत्म हो जायँगी |” यह ढंग है जिसके द्वारा हम एक हँसता हुआ सुखी चेहरा प्राप्त कर सकते है । लोग हमारे बारे में जानना चाहेंगे, क्‍योंकि हमें देखकर वे प्रसन्नता अनुभव करेंगे । यह कहना मूखेता की बात है कि आप इतने सममदार नहीं कि लोगों को मित्र बना सके। यदि आप एक साधारण सूम-बूक और समझ के आदमी हैं और आपमें कोई खराबी नहीं, तो आपका यह कथन सर्वथा असम्भव है। ऊँचे गणित के किसी विवाद में पड़ना मैं पसन्द नहीं करता | कोशिश करने पर भी ऐसी किसी बहस में हिस्सा नहीं ले सकता | मुझे न तो गणित विद्या का ज्ञान है और न इस दिशा में मेरी रुकान है । किन्तु इसका यह मतलब नहीं कि में समझदार नहीं। फिर भी




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now