आर्यसमाज के एक सौ प्रश्नों का उत्तर | Aryasamaj Ke Eksoi Prashno Ke Uttar
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
98
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ७ )
परम्परा वां पर दी समाप्त दो जाती है, इसी प्रकार आत्मा
के साथ सन्तानङूप अनादिक्राल से लगे हुए कर्म भी समाप्त
हो जाते हैं । जिन बुरे भावों से कर्म बँधते हैं उन भावों को
आत्मा यदि दृटा दे तो फिर आगे कर्मबन्ध भी नहीं हो पाता ।
गन्धकी कुंड में ( जिन चूते हुए पानी के कुंड के नीचे
गन्धक आदि पद्/र्थ होतां है ली कारण कारण-अनादि से
उन कुंडो का पानी गर्म होता दै ) पानी अनादिकरात्न से गर्म '
दांता है, किन्तु यदि उली जलको वहां से निकाल कर गह्ढा
आदि नदी में डाल्न दिया जावे तों उसकी बेखी अतादि का-
लीन गमे दालन खत्म हो जाती है। दसी प्रकार अनादिकालीन
कमे भी आत्मा से अलग दो जाते है. ।
कमे श्रात्माके साथ संयोग सम्बन्ध से रहते है; इखो
कारण वे च्ूटते भी रहते हैँ । नियमाचुसखार किसी समय वे
बिलकुल सी आत्मा से दुर दो सक्ते है ।
अत्मा की वैभाविकदशामे क्मौ का बन्धन होना र्ता
है । जिस समय वह विभावदशा मिरकर स्वाभाविकद्शा प्रगट
दोजाती है, कमंबन्च्र भी बन्द दो जाता है । जैसे कि श्रि
आंदि की उपाधिसे पानो गर्म होता है ओर ज्व वह उपाधि
ঘতত আন রী पानी अपनी असल द्वाल्त में आकर ठंडा दो
जाता है।
प्रश्त ३--पर्याय बदलता द्रव्य का स्वासाविक धर्म है
या वैसाधिक । यदि स्वाभाविक है तो मुक्त जीवों का पर्याय
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