मीरा बृहत्पदावली भाग - 1 | Mira Brihatpadawali Bhag - 1

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
348
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)_ मीरां बृहत् पदावली [ ३पद-५ : राग-कालिगड़ा वा कान्हड़ा : ताल-धीमा तिताला
( भगवत् लीला )अजी ये ललाजू आज गोकुल बासी (टेर)
गोकुल बासी प्राण हमारे, हाँ ललाजी ।
श्यामसुंदर अविनासी ॥| १
इत गोकुल उत मथुरा नगरी, हाँ ललाजी ।
नीचे नदी यमुनासी ॥ २
यमुना के तीरे धेनु चरावें, हाँ ललाजी ।
हाथ लिये नौलासी ॥ ३
बृन्दावन की कुंजगलिन में, हाँ ललाजी ।
संग दुलहिन राधासी ||
मीराँ के प्रभु गिरधरनागर, हाँ ललाजी ।
तुम ठाकुर मैं दासी ॥। ५ॐ ®पद-६ : राग-विहाग : ताल-कहरवा
( मनस्ताप )ग्रपर्णाँ करमदही का खोट, दोष कई दीजेरी भ्राली (टेर)मैं तासू बृकू' कोई न बतावे, सब ही बटाऊ लोग ।सुणाजो री मोरी संग की सहेली, बाट चलत लगी चोट ॥| १
अपणा दरद कूँ सब कोई जाणें, पर दुख 'कूँ नहिं कोइ ।मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, बची चरण की ओट ॥ २& ॐ ॐ५-२ (म); (आा-सा-भा. १ पृ. ११३)
६-२ (म) টু (कब्. १ ३)/
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