पद्मिनी चरित्र चौपायि | Padhmini Charitra Choupai

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Padhmini Charitra Choupai by लालचन्द्र - Lalchandra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( ७ ) इस मत्रणा का दोष सुपत्नी प्रभावती के पुत्र वीरमाण को दिया गया है | (बे) कथा भाग को यत्र-ततन्र परिवद्धित कर दिया गया है| दलपत-दौछतविजय के ख़ुमाण-रासों से भी पद्मिनीकी कथा दै राघवचंतन्य से अलाउ्दीनने राणा रतनसेन को पकडा । किन्तु इसमे रतनसेन जटमर नाहर की गोरा बादल चोपई' का कायर रतनसेन नहीं है, इसका अछाउद्दीन भी कुछ वादशाही शान रखता हें। उसने गुण को परखना सीखा हे | ` राजपूत कालीन राजपृती का सुन्दर वणन भी इन शब्दों में दर्शनीय हे । ग्जपूता ए रीत सढाई, मरणें मंगल हरखित थाई ॥४ण॥। रिण रहचिया म रोय, रोए रण भाजे गया । मरणे मगल होय, इण घर आगा হী ভবাঁ।| ৮৫11 इस विपय की अनेक अन्य ऋृतियां भी प्राप्त है? । टॉड ने अग्रेजी मे पदमनी का चरित्र श्रस्तुत किया है। उसने रतनसेन के स्थान पर भीमसिंह को रखा । पद्िमनी सिंहलल्लीप के राजा हमीरसिंह चौहान की पुत्री है। गोरा पदिमनी का १--देखं प° १२९-१८१ कै रखें शोच पत्रिका, माग 3, আন্ত ? में श्री नाइटाजी का उपयुष्त रेखे ।




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