सज्जन भजन भारती | Sajjan Bhajan Bharti

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Sajjan Bhajan Bharti by शिवजीरामजी जैन - Shivjiramji Jain

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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, स्तवन चौबीसी ` १. आदि जिन स्तवन [तर्जे----मारवाड़ी---लोंटस करवा की | प्रभु ऋषभ जिनन्दा साँभलजो रे, व्हाला मुझ अरदास””॥टेर॥ काल अनादिनी प्रीतिडी .जिनजी रे ` सुखकारी रे म्दाया ऋषम्‌ जिनन्दाः _ तोडीने.रे .करियु . मोक्ष. मां. वास, प्रभुः ऋषय -जिनन्दा ““ ४४ ॥ १1 - ह अधमा. भवारण्य मां जिनजी.रे जयकारी रे.-प्रभरु . ऋषभ जिनन्दा, ` र्खडीने वहु पामीः कर्मनी লাজ प्रभू ऋषभ जिनन्दा ४४ ४४ 1 २॥ आवी प्रीति नहीं सृज्ञजननी रे, मनहारी रे““प्रभ्‌ ऋषभ जिनन्दा, ` ए नहीं प्रीति नी रीति छे खास । प्रभ ऋषभ जिनन्दा ““ “^ -॥ ३॥। प्रीति तो. एम - पिछाणिये .जिनजी रे शिवकारी रे प्रभु ऋषभ जिनन्दा आपे रे जेह मित्र ने सुखनो वास (এ प्रभु ऋषभ जिननदा ४४ ०४४ ॥४॥




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