सत्य सरोवर | Satya Sarowar

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Satya Sarowar by मुनि मनोहर 'कुमुद' - Muni Manohar 'Kumud'

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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চ. छपाइन्सामग्रियां गिर रहीं हैं| मा थे दृदय रुणयर में নি उठ रमी ह| पिता का मन-विदग प्रनेता षा रेड बगा रहा है थौर सर्प उस युवक क्रो स्यनस धरती मे अपने भविष्य बी मधुर चाशा ধা নয়া ভুত रहे हैं।स्वस्ना परिजनों वे लेमे र्वा उदन र है।चरा श्रार मे 'বিথাহ হা का सुमपुर घतजिपां झा रही ई। गश्य जये खर्र भी पलिये फन्‍्या ये घर रू शभ्रार यहां भी देख्य, बसा आन 5 दा रा दे ! यहां वी ठाट का ता पएना ही क्या है ! ४! दे) सराया भा रह है । वर थे शुभागमा पर स्वागतम! कहे या लिये गलियां सज रदो दै परण दवारों शौर भह्ियों ऐे! बदनवार गहद्वारों का शाभा इदा रहे ईं। मां बाप छापा तर से एक भार ठतारजर इलका हो छाना खाइते हैं | युक्ता श्ये खीएन-साथो व चन्द्र मृत कं दशन ये निय उमुक शर्ध । अदाता कौ दा जनतो मरा'लें धक दूसरे ये डाहुपारा में बाघ जाना चाहतांडहे | मधु मिलन की शुभ पड़ी मे शुभागमन की शुमाशा लग रहो हं श्रीर प1 ज्यों हितिनी आशाश्ों ये दीपक हसकमा हर में संशये जा रहे हैं। धामिर बह टिए ऋा हो गया जिस के प्रतीत करते पत्र थश হা थी! जिः মহাসিলন থং হং আন ছা फूल, पूल पूल ढर फूला नहीं समाता । কিল হা ! माग्य णी पियरी में न जाये क्या बुद छुपा दाता है । তা दुभाग्य की चल परी आधा, धाशाओं या दीप सब बुझे गये । कामनाओं थे सुहर भयन सत्र दृ4 गये। আ।বল ভাম্পী ঘ লিন তা कीमलचुडुम, एक द्ूद कर गिर पड़ा पथित्री पर और उसे उठा कर चढ़ा दिया गया आग की बलदी-बनते) चिता प२, श्रीद दमय ष्टो শ্যি' गया उमर की डाह पर, दा विरहन्ध्राग में जलने ५ लिये । সিন धॉँतों में थी मस्ती उस से चन रहो है श्राँतुग्रा क गंगा | शरीर श हर ब्रग था शामा का मशर अरब है कीविद्ोततां का श्रागार । मिन श्रधर| पर था मुखरित হাব, ভ पर है अ्रव मूद्र शोक मृख-लालिमा सत्र गायर बाल सव अस्त ब्यम्त | मोष वा मिल्युर और




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