श्री रामचरण हयारण मित्र के काव्य का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन बुन्देली काव्य के परिप्रेक्ष्य में | Shree Ramcharan Hayaran Mitr Ke Kavya Ka Sahityik Avam Sanskritik Adhyyan Bundeli Kavya Ke Pariprekshy Mein

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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चेदि के साथ दशार्ण मूभाग को जोड़ने पर वर्तमान बुन्देलखण्ड की सीमा रेखाओं के रंग दिखने लगते हैं। पंजाब का नाम जैसे पांच नदियों के कारण रखा गया उसी प्रकार बुन्देलखण्ड का दशार्ण नाम धसान, पार्वती, सिन्ध (काली) , बेतवा, चम्बल , जमुना, नर्मदा, 'कन, टॉस और जामनेर दस नदियों के कारण पड़ा । इनमें से क॒छ नदियां बुन्देलखण्ड के भूभाग को सींचती हैं और कुछ नदियां उसकी सीमा बनाती है। 2. इसी बृहत्तर बुन्देलखण्ड की सीमा को देखते हुऐ दीवान प्रतिपालसिंह की मान्यता है... कि पूर्वं में दोस ओौर सोन नदियां अथवा वघेलखण्ड या रीवां राज्य तथा बनारस कं निकट बुन्देला नाले तक सिलसिला हे। पश्चिम में बेतवा ओर चंबल नदिर्याँ, विन्ध्याचल श्रेणी सिंघिया का ग्वालियर राज्य और भोपाल राज्य के साथ पूर्वी मालवा इसी में आता है। उत्तर में यमुना और गंगा नदियाँ, इटावा, कानपुर, फतेहपुर, इलाहाबाद और मिर्जापुर से बुन्देलखण्ड की सीमाऐं बनाती है। 3. प्रसिद्ध मूगोल बेत्ता एस0एम0 अली - दि ज्याग्रफी ऑफ दि पुरानाज ” - ग्रन्थ में विन्ध्य क्षेत्र कं विदिशा, दशार्णं एवं करूष जनपदों से बुन्देलखण्ड का रिश्ता जोड़ते हैं। अत: श्री अली साहब भी बेतवा , धसान, केन , नर्वदा नदियों के तटवर्ती क्षेत्र को बुन्देलखण्ड मानते हैं। “ 2. मघुकर अक - 7 - गोविन्दराय जेन । 3. बुन्दलखण्ड का इतिहास ~ प्रथम भाग दीवान प्रतिपालसिंह पृ 5 4. दि ज्याग्रफ्री ऑफ दि पुरानाज - एम0एम0 अली पृ0 160




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