विश्व परिचय | Vishva Parichay

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
शेयर जरूर करें
Vishva Parichay by रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur

एक विचार :

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
विश्व-परिचयपरमाणलोक, हमारा सजीब शरीर कई बोध या समभ की शक्तियों को ले कर पेदा हुआ है, जेसे देखने का बोध, सुनने का बोध, सूंघने का बोध, चखने का वोध ओर छूने का बोध | इन्हीं को हम अनुभूति कहते हैं। इन के साथ हमारा अच्छा-बुरा छगना और हमारे सुख-दुःख गंथे हुए ই। `हमारी इन अयुभूतियो की सीमाः बहुत अधिक नहीं है । हम बहुत थोड़ी दूर तक ही देख सकते ই आर बहुत कम वातं खुन सकते है । अन्यान्य बोध शक्तियों की दौड़ भी बहुत दूर तक नहीं है। इसका मतलब यह है कि हम जितनी शक्ति का सम्बल ले कर आये हैं वह इसी हिसाव से मिली है कि हम इस पृथ्वी पर अपने प्राण बचा रखे'।जिस नक्षत्र से पृथ्वी का जन्म हुआ है और जिसकी ज्योति इसके प्राणों का पालन कर रही है वह है सूथ । इस सू्यने हमारे चारों ओर प्रकाश का पर्दा टाँग दिया है। प्ृरथ्वीके सिवा : इस विश्वमे ओर भी क रै, यह चात बह देखने नहीं देता । किन्तु दिन समाप्त होता है, सूरज डूबता है, आलोक का पर्दा




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :