स्वामी रामतीर्थ का जीवन चरित्र | Swami Ramtirth Ka Jeevan Charitr

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
95
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( ११ )
की परिस्थिति उस समय ऐसी नहीं थी | आजकल
लाहौर ने बड़ी उन्नति कर ली है । उस समय वहाँ पर
केवल तीन कालेज थे, जिनमें गवरनमेंट कालेज और
फारमेन क्रिश्वियन कालेज उन्नत दशा में थे। तीसरा
कालेज दयानन्द एड्रलो-बेदिक कालेज था, जो कि उस
समय नया ही था | अब दयानन्द एंगलो-बेंदिक कालेज
ने भी बड़ी उन्नति कर ली है, विशेष क्या, अब तो
भारतवर्षं भर में इस जेसे सिफ २-४ कालेज हैं, जिनमें
इतनी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्राप्त कर सकते हैं
और शुल्क भी कम लिया जाता है तथा धनहीन विद्या-
थियों को निःशुल्क भी शिक्षा मिलती हैं। इस कालेज
के अध्यापकों तथा विद्याथियों का जीवन बहुत ही सादा
होता है। अध्यापकों के स्वार्थ-व्याग का नमूना जेसा
यहाँ मिल सकता है वैसा पूना के फग्युसन कालेज आदि.
एक दो कालेजों को छोड़ कर अन्यत्र मिलना कठिन है |
अपने-अपने विषय में विशेष योग्यता रखते हुए भी यहाँ
के अध्यापक बहुत कम वेतन लेते हैं। भारतीय विश्व-
विद्यालयों के प्रोफेसरों का वेतन ८५०) से लेकर १२००)
तक होता है, तथा रीडरों का वेतन ४७५०) से ८५०)
तक होता है ओर लेक्चरर अथांत तीसरी श्रेणी के अध्या-
पकों का वेतन भी २४०) से ४७५४०) तक होता है | इसी
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