राजनीती शास्त्र के मूल सिद्धान्त | Principles Of Political Science

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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सेरकार के प्रकार, शासन से बालन, न्यायालय, विधि तिर्माण की प्रक्रिया आई का अध्ययत किया जाता है । जेलिनेक, ऊैविस, आदि विद्वानों ने भी इस वर्गीकरण को उपयुक्त माना है। फ्रडरिक पोछक ने राज्य विषयक विषय सामग्रो को निम्त प्र्मार से वर्गीकृत किया है । फ्रेडरिक पोलक का वर्गीकरण #` इ क विमाय प्रतिरक्षा और व्यवस्या राजस्व और कर व्यवह्याउत्तरदायित्व प्रयायकीय सेवि घान, सेना,রি 1 রাযি রি জারারা विषय सामप्री पार {६ ष ५. सैद्धान्तिक राजनोति ध्यावहरिक राजनीति 1] राज्य राजनतिक संगठन को उत्पत्ति | सरकार के बर्तेमान स्वरूप (क) ऐतिहासिक संघ तथा संघोय राज्य (ख) ताकि स्वाघोनता संविधान संरकछ्ित प्रदेश तथा देश से सरकार के प्रकारों का वर्णीकरण| बाहर के प्रादेशिक छेत्र অনবিঙ্গ পয 2 | घरकार पंस्‍्वाओं के प्रकार वेघानिक फाठून और प्रषोपं प्रतिनिध्याटथङ पूर्ण प्रश/वकीय | संपरोय प्रगालो চা ঝংকার मंत्रिमंडलीय एवं सचिव तंत्रीय3.) ब्यवस्थादन4राष्ट्रो की उति स्वीकारास्म$ दिवि का देव वया दमी सीमेवयुवस्थ( (व के उरं इय स्वीकारातमह्त विधि का सामार्प स्वष्ठा तथा विमाजन (दिषि तषा साम्य न्याय सम्बन्धी दर्शन)कातुनों को स्वीकृत तथा उसके दव, ग्यवस्वा तयः प्रणा- सनं माषा एव प्रणालो। (व्यवन्दापन कीयांत्रिकता) व्यक्त रूप में | अन्य राज्यों तथा ब्यवित-- राम्प पिद्धास्त | समूद्‌ के साप सम्बन्ध अस्त-- राष्ट्रीय सम्बध्धनौसेवा, पुलित्,, मुद्रा बजट और #पापारराजकीय नियत हप हस्पसे। निषेधযান সঙ্গি(ধিবাদবী को व्यवस्थापन का रूप देता)संत्रीप प्राहप लेखनविशेष राज्यों का न्याय दर्यत श्यायातप प्रोर उप्तकी যাঁতি- क्तान्याय सम्दरदी उदाहरण तथा स्पायाधिकार ।कूटनीति, शातरि, हथा युद्ध सम्मेलन, घिया तेवा संगठन स्याय, ध्यापार तथा संचार को उलति के लिए इिये गये अन्‍्वर्शद्रीय समझौतेगसन সা 2 হাসল ও 0৩ সতত ৩ ইজ, 2০ 9-1৩5$




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