बुन्देलखण्ड में दुर्ग निर्माण एक पुरातात्विक अध्ययन | Bundelkhand Mein Durg Nirman Ek Puratatvik Adhyyan

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Bundelkhand Mein Durg Nirman Ek Puratatvik Adhyyan by पुरुषोत्तम सिंह - Purushottam Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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परिखा, प्राकार, वप्र ओर बुर्ज आदि से पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से सुसज्जित निर्माण को दुर्ग के भाव में गृहण कि गया है। जिस प्रकार भारत में किलों और गढ़ियों के निर्माण की परम्परा समृद्ध रही है, उसी प्रकार बुन्देलखण्ड में भी किलों और गढ़ियों का बहुतायत से निर्माण किया गया। ये किले वर्तमान में तीन स्थितियों में हैं- ध्वस्त, खण्डहर और अपेक्षाकृत ठीक। अध्ययन क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 270 किले हैं, जिनमें से आधे स्थलों में ये निर्माण लगभग अदृश्य हो चुके हैं। जो शेष हैं, उनमें से अधिकांश की चर्चा समुचित सन्दर्भा मं प्रस्तुत प्रबन्ध में की गयी हे, परन्तु लगभग 25 किले प्रमुख रूप से अध्ययन की विषय वस्तु बन सके हैं| अध्ययन क्षेत्र यमुना के दक्षिणी भाग को, जिसे आजकल बुन्देलखण्ड कहा जाता है, प्राचीन इतिहास में इसके कई अन्य नाम भी मिलते हैं। महाभारत काल में इसे “चेदि' प्रदेश के नाम से जाना जाता था जो महाजनपद काल में भी चेदि के नाम से विख्यात रहा। चन्देलकालीन शासन मँ यह जेजाकमभुक्ति' के नाम से विख्यात रहा जिसे जयभुक्ति या 'जेजाक भूमि भी कह कर पुकारा गया। आज भी इसका अपभ्रंश 'जुझीति' उपलब्ध हे । स्वर्गीय कृष्ण बलदेव वर्मा का तकं हे कि वैदिक कालीन यजुर्वेदीय कर्मकाण्ड का यहां सर्वप्रथम अभ्युदय होने के कारण यह प्रदेश यजुर्हाति, कहा गया जिसका अपभ्रंश ২ वर्तमान जुझौति है। बुन्देलखण्ड दशार्ण देश के नाम से भी जाना गया, जिसकी चर्चा... रा कालिदास ने मेघदूतम्‌ में पूर्वमेघ के श्लोक 23 में की है। बुन्देलखण्ड का पूर्वी भाग चः ध 1 कभी डाहल प्रदेश के नाम से जाना जाता था। वर्तमान बुन्देलखण्ड नाम क्यो पड़ा, ` इसमें भी अनेक मतभेद है । कुछ विद्वानों का मत हैँ कि विन्ध्य उपत्यका मे स्थित होने ` के कारण यह 'विन््येलखण्ड विव्य परिवर्तित होकर बुन्देलखण्ड हो गया। कुछ রর | इतिहासकारों का मत है कि बुन्देला शासकों के पूर्वज गहरवार क्षत्रिय তাজা নী > < ` विन्ध्यवासिनी की अराधना करते हुये रक्त बंदे चढ़ायी थीं. अतः उनकी संताने बुन्देला कहलायी तथा उनके द्वारा शासित क्षेत्र बुन्देलखण्ड के नाम से जाना गया। एतिहासिक




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