बृहत् सामयिक पाठ | Briht Samayik Path

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Briht Samayik Path  by मूलचंद किसनदास कपाडिया -Moolchand Kisandas Kapadiya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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३२ ३३ ३८ ४९. खा युद्धिपत्र अशुद्ध . चह संस्थाप्प शीघ्र मंगलब्घ खर्र ऽप्भम्मि मामाप्यते क्षयाथ भयर्यताण অং হা मपक्षणानां चडमाण बल णिकार्ल . शद्ध कह संस्थाप्य शीघं भंगलब्ध ऊगेंद्र उच्छमि माप्यते क्षयार्थं भययंताणे শক: चेंदन मपीक्षणानां चडमाण च টু चले णिच कात




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