मानव जीवन का लक्ष्य | Manav Jeevan Ka Lakshya

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Manav Jeevan Ka Lakshya  by हनुमान प्रसाद पोद्दार - Hanuman Prasad Poddar

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He was great saint.He was co-founder Of GEETAPRESS Gorakhpur. Once He got Darshan of a Himalayan saint, who directed him to re stablish vadik sahitya. From that day he worked towards stablish Geeta press.
He was real vaishnava ,Great devoty of Sri Radha Krishna.

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मानय-जीवनका लक्ष्य--भगवदत्याप्ति १५. अपने घरमें झाड़ू छगाओ । गंदी झाड़ू लेकर दूसरेका मकान साफ करने जाओगे तो वहाँ मी गंदगी ही फेलाओगे; सफाई तो कट्ठोंसे करोंगे ? अपना हृदय पहले साफ ऐना चाहिये। हृदयवी खच्छताकी कसौटी व्या है-- मने शान्ति, प्रसन्नता, त्याग, वैराग्य, सौम्यता, असा, सत्य, प्रेम, इन्द्रिय-निग्रह, सर्ता, समता, निरमिमानिता, नप्ता; भगवान्‌के प्रति चित्तकी चृत्तिका प्रवाह, संसारम उपरति दथा देवी-सम्पत्तिके अन्यान्य सदृगुणोका होना । वह व्यक्ति भाग्यवान्‌ है, जिसके जीवनम संसार भगवान्‌कै रूपके अतिरिक्त आता नदीं ओर जरूरत पडइनेपर कठिनतासे कना पड़ता है । वह देखता है कि जगत्‌ तो है नहों । गीताका असछी ममे भगवानने बताया कि जगत वास्तवे केव मगान्‌ पूरण है-+वाखुदेवः सवंमिति ! यह जगत्‌ जो दीव रहा है, ऐसा यह प्राप्त नहीं ह्येता, क्ष्योंकि ऐसा है नहीं । हिनेमा देखते समय पर्देपर सारा ससार दिखायी देता है, पर पकड़नेपर हाथमें नहीं आता | इसी प्रकार यह संसार नो दीखता है, वह दीखता भर है--मिलता नहीं--- न तथ।( उपरम्यते 1? हसीलिये कि यह मायास्ना राज्य है| अज्ञानकी करपना है । इसमे मनको फसा केना स्वता है | पढा या बेपढा,. जो भी फसता है, वह मखे ही है । भपटित पख॑ता करता है परंतु उसमे श्रद्वके सहज जाग जनेकी सम्भावना है | अत वह राहपर आ सक्ता है । किंतु शिक्षित मर्ख तो प्रायः জন होता है । शिक्षितकी मति विगइनेपर वह জন্তু हो जाता है!




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