समाज और राज्य : भारतीय विचार | Samaj Aur Rajya : Bhartiya Vichar

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : समाज और राज्य : भारतीय विचार - Samaj Aur Rajya : Bhartiya Vichar

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about डॉ. सुरेन्द्रनाथ मीतल - Dr. Surendranath Mital

Add Infomation About. Dr. Surendranath Mital

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
भादकथन कोई भी ग्रन्थ किसी निश्चित परन्तु सीमित उद्देश्य को ले कर लिखा जाता है । यह ग्रन्थ भी इसी प्रकार से एक सीमित उद्देश्य को लेकर लिखा गया है । वह्‌ उद्देश्य है भारतीय समाज और राज्य-व्यवस्था के भ्रमुख अज़ों का सकारण विश्लेषण करना | इसकी आवश्यकता इसलिए उत्पन्न हुई कि वर्तमानकाल में भारतीय समाज और राज्य-व्यवस्था के मुलाधारों को समझ कर उनके आधार पर उस व्यवस्था का विश्लेषण करने की पद्धति बिल्कुल नहों है। इसके अतिरिक्त भारतीय सामाजिक विचारों की, ओर भारतीय समाण-व्यवस्था का वर्णान करनेवाले ग्रन्थों की मान्यताओ्रों को भी वर्तमान विद्वज्जगत्‌ द्वारा लगभग कोई महत्त्व नहीं दिया जाता, यद्यपि उन मान्यताग्रों को अस्वीकार कर समाज-व्यवस्था अथवा राज्य-व्यवस्था का अ्रव्ययन करना, विकृत चित्र ही प्रस्तुत करेगा (देखिये, आगे अ्रध्याय १ का अन्तिम पृष्ठ--श्री रज्जगस्वामी आयज्भर का उद्धरण) | इस कारण इस ग्रन्थ में भारतीय सामाजिक विचारकों की सान्यताओं को ध्यान में रखते हुए समाज और राज्य-व्यवस्था के कुछ ग्रद्धों तथा तत्सम्बन्धी विविध समस्याभ्रों पर विचार किया गया है । जेसा बताया गया, भारतीय समाज-रचना और राज्य-व्यवस्था के मूलाधारों तथा भारतीय सामाजिक विचारों की मान्यताञ्रों को मान कर सम्पूर्ण भारतीय जीवन-प्रणाली का चित्र वर्तमानकाल में लगभग प्रस्तुत नहीं हुआ है और इसलिए इस ग्रन्थ में स्पष्ट कौ गयी धारणाभ्रों मेँ मौलिक विचार अ्रवश्य प्रस्तुत करना पड़ा है । इसके अतिरिक्त निम्न विषयों का भी विवेचन लगभग प्रथम बार किया गया है--- क, त्रिवर्ग (धर्म, अथ, काम) से वर्राश्रम व्यवस्था का सम्बन्ध । ख. चित्त-शुद्धि के साधनों--दान, यज्ञ, तप श्रादि-का श्रथं श्रौर उनका विवेचन । , ग. सियो के स्थान का सकारण तथा सम्पूणं समाज-व्यवस्था के साथ एकरूप विवेचन । घ, भारतोय नैतिक धारणाश्रं की कल्पना । ड., भारतीय धमम-राज्य का अर्थ तथा उसमें और साम्प्रदायिक राज्य में ग्रन्तर । च. भारतीय व्यवस्था में राज्य को सौंपे गये कार्यों का विस्तृत विश्लेषण । ख, विधि तथा दण्ड सम्बन्धी भारतीय विचार ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now