अभिलाष माधुरी | Abhilash Madhuri

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
15 MB
कुल पष्ठ :
337
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)* श्री औराघारमणों जयति #
॥ जबगोर ॥अभिटाष माधुरी |वधाशरमण्चस्णकमदेभ्यो नम्: । श्री इष्णयेतन्यपादददूमेभ्यो नमः ।
अभिखाघ् मुरी रुलितकिरोरौ विरचिता प्रारभ्यते ।अथ क्किय शुंगार शतक ।
दोहा ।करुणालय गौराड़ के, पदसरोज सुखरास ।
दीजै इन अँखियांन को, सेवा्कुंज निवास ॥ १ ॥।
राधागोविंद प्राण है चरणपद्य सुखधाम ।
करुणाकरि मुहि दीजिये, निष्ुवन में विश्राम ॥ :
पद् पंकज तुव दरस को, अचियां भई विदाल ।
डरी रहों वन कुंज में, राधावब्लमलाल ॥ ३ ॥
जुगल चेद्र मुख लखन को, नेना भये चकोर ।
ललित किशोरी बोलिये, वृन्दावन की और ॥ ४
अति अज्ञान अयान हों, ना जानों विधि सेव ।
चूक किशोरी माफ़ करि, श्रीवन मारग देव ॥ ও
जुगलबिहारी दरस को, रहि रहे जिय अकुछाय
कृपा कोर दग देरिये, औबिन बेगि बुलाय ॥ ६ ॥
ब्रजरज अंग परसाइये, ठलितकिशोरी श्याम ।
नैनन सण सरसाइये ओ्रीवृन्दाबन धाम ॥ ७
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