भूचाल | Bhoochal

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Bhoochal by रामसिंह - Ramsingh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भूचाल ६ उपाय का झवलम्बन किया जाए तब बाहर कुटिया से कुछ दूर पर कोई , युवक साधु रामदास से पूछ रहा था, “क्या यहां पटना के कोई रईम ठह हैं ! उनके साथ एक स्त्री भी है।वे अभी कुछ दिन पहिले भूचाल में नाव उल्लट जाने से गंगा में बह आए, थे | हम उनका तार पाकर पटना से समस्तीपुर गांव में पहुंचे थे | वहां से पता लगा कि वे लोग गंगा के फ़िनारे साधु रामदास की कुटिया में हैं।? साधु रामदास कह रहे थे, “हां, आइए । वे लोग यहां ही हैं। आप क्या पटना से आरहे हैं ! आप उनके क्या लगते हूँ !? ओर भी न जाने क्या क्या बाते साधु रामदास ने एक ही सांस में उससे पूछ डालीं। कान में परिचित शब्द पढ़ते पर अवधबिहारालाल भी कुटिया से बाहर निक्न आए | उन्होने देखा कि उनकी आंखों के सामने केवल कुछ गज की दूरी पर ही उनका छोटा लड़का सुशीक्ष खड़ा था। उसके कड़े अस्त-व्यस्त हो रहे थे, मुंह सूख रहा था, चेहरे पर उदासी की काली छाथा थी और बाल रूखें- ओर चिखरे हुए थे | उसकी आवाज भरा रही थी मानो उसको रोना आरहा हो। अचानक उसकी दृष्टि कुटिया के द्वार पर खड़े हुए अवधनरिदाारीलाल पर पड़ी | वह दौड़ कर जमके पेरों से लिपट गया और फूट-फूटकर रोने लगा। अवधबिहारीलाल का हृदय भी भर आया | उन्होंने. हृदय का बांध बहुत ऊंचा किया, किस्तु फिर भी उसके ऊपर से दुःख के आंसुओं की दुँदों के रूप में बह निकला | सुशौल की ञ्रावाज को सुनकर कुटिया में से मनोरमा भी निकल आई। उससे सुशील को गोद्‌ में सर लिया ओर फूट-फूटकर रोने लगी । धीरे-धीरे श्रवधबिद्दरीलाज् और मनोरमा का रोना रुक गया; किन्तु सुशील के आंसू थमते हो न थे। अवधबिद्दरीलाल और मनोरमा पूछ रहे थे, विनोद कहां है! शान्ता कहां है १ किन्तु सुशील का गला बन्द्‌ था। वह अपनी मां और अपने पिता के इन प्रश्नों का उत्तर आंसुग्रों की मूक भाषा में दे रहा था।




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