झारखण्ड झनकार | Jharakhand Jhanakar

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Jharakhand Jhanakar by डॉ ० रघुवीर प्रसाद - Dr. Raghuvir Prasad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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ছু भारखण्ड-फनकार में था तब कोरिया के सुपरिंटडंट ने यह हक पाने के लिए लिखा- पढ़ी की थी। उस पर भारत-सरकार ने इन दोनों रियासतों का अपने खनिज पदार्था की आय का आधा हिस्सा पाने की स्वीकृति दी थी । श्रीमान्‌ कारिया-नरेश क, इस हुक्म की अपील करने पर, हाल ही में कोरिया और चांगभखार- नरेशों का सिरगुजा, उदयपुर ओर जशपुर-नरेशों के समान अपने अपने राज्य के खनिज पदार्थों पर पूणो अधिकार दिया गया है अतः अब इन पाँचों रियासतों की सनदों में कोई भेद नहीं है। इन सब नरेशों का वह सनद भी प्राप्त है जिससे राज्य के उत्तराधिकारी न होने पर ये सामाजिक नियम तथा हिदू-धर्मशाख को अनुसार दत्तक पुत्र ले सकते हैं। लगभग बीस साल पहले तक इनका दण्ड देने के अधिकार कम थे । खून या अन्य संगीन नजुर्मो कं मुकदर्मो का फंसला इनको अदालतों में नहीं हो सकता था ओर पांच साल्ल जेल तथा २००) रुपये जुरमाना से अधिक सज्ञा ये नहा दे सक्ते थे | दा साल्ल से अधिक जेल की अथवा ५०) रुपये से अधिक जुरमाने की सज़ा देने के लिए जनाब कमिश्नर साहब छत्तीस- गढ़ की रवीकृति की ज़रूरत होती थी | अब इन नरेशों को वे ही अधिकार हैं जो छत्तीसगढ़ की अन्य रियासतों के नरेशों को हैं । इनकी अदालत में अब खून या दूसरे संगीन जुर्मों के मुकदमें भी चल्लाये जा सकते और उनका फेसला हो सकता ₹। सिफ फांसी की सज्ञा के लिए मान्यवर गवर्नर साहब की




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