मधु-सीकर | Madhu-Sikar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
161
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)कुमुद ने रमेश की ओर देखकर कुछ हंस कर कद्दा “मेरा
अनुभव क्या ! पर इतना अवश्य कह सकती हू कि मदिरा है
बहुत बुरी चीज़” !रमेश को यद्द बात काफ़ी बुरी लगी कि प्रकाश ने क्यो
कुमुद से यह विषय छेड़ दिया--ओर उसने इस विषय का अ्रधिक
बढ़ाव अच्छा न समझ कर प्रकाश से कहा “अच्छा प्रकाश `
चलो कुछ घूम फिर श्राव'चली न १”प्रकाश कोट पहन कर दोस्त के साथ टदलने चल दिए '
कुमुद अपने गरहस्थी के कामोंमे व्यस्त दहो गड |>< >< ১৫कुमुद ने प्रकाश को आते देख कर दाथ की उपन्यास
चारपाई पर रख दी ओर उठ कर ब्रैठ गई ! पर जैसे दी उसने
एक बार प्रकाश की ओर आँख भर कर देखा उसके रोए भिरक
उठे--बद्द उठ कर पलंग के नीचे खड़ी द्वो गई ओर प्रकाश की
एक एक बात बड़े ग्रोर से देखने लगी--वह् लाल लाल
आंखें ! वह भराया हुआ चेहरा ! वद डगमगाते हुए. कदम !
यद्द सब बह क्या देख रही है, वह मन द्वी मन एक बहुत बड़ी७
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