कुलीन धराना | Kuleen Dharaana

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Kuleen Dharaana by इवान तुर्गनेव -Iwan Turgnev

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कलीन धराना | १३ | गोडोन्सकी ने जेब से बढ़िया रुमाल निकाल कर आंखें पोंछनी शुरू कीं, 'ऐसी स्त्रियां भी होती ही हैं दुनिया में--पर अधिकतर आज कितनी मिट्टी जड़ रही हे” बात बदलते हुए बह बोल्ञा। “मां-सां” एक ग्यारह वर्ष की सुन्दर बालिका भागती हुई ` कमरे में आई “माँ, बलेडिमीर तिकोलिंच घोड़े पर आ रहा है ।” मारया उठी--गोडोन्सकी ने भी उठ कर ऐलीना को प्रणाम किया और फिर एक ओर खड़ा हो गया । “माँ, उसका घोड़ा कितना सुन्दर है । अभी दम ने उसे जाहिर के दरवाज़ों पर देखा था । वह कहता था अभी इधर ही आ रहा हू ।”? इतने में घोड़े के पैरों की आवाज़ आने लगी और क्षण भर में एक सन्दर युवक एक बहुत बढ़िया घोड़े पर बेठा सड़क पर आता हुआ दिखाई दिया । घोड़े को सने खिड़की के सामने खड़ा कर दिया । “कैसी हो मारया मिन्नविता” बाहर से ही बड़े मंधर स्वर मे वह बोला “देखी है यह मेरी नयी खरीद!” ` `. मास्या खिड़की में आ गई নি . “अच्छे हो, बजैडिमीर ! वाह, कैसा सन्दर घोड़ा है। कहाँ से लिया ?” “फौज के ठेकेदार से लिया है--पर उस चोर ने मुक्त से खूब चैसे ठगे हैं” युवक ने कहा।




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