काया पलट नाटक | Kaya Palat Natak
श्रेणी : पौराणिक / Mythological

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
76
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)काया पलट | १५
উরি
কি রিট म. नरक ररर ९
दक राद ऽसीति रक्ते है फिर श्रौर फिसी से राह तीं ।
फुछ भरने का संदेह नहीं कुछ जीने की परवाद नहीं ॥
कुछ जुल्म नहीं कुछ जोरनहों कुछ दाद नहीं फ़रवाद नहीं ।
कु तेद नहीं कुछ वंद नहीं कुछ जबर नहीं आजाद नहीं॥
शागिद् नहीं उस्ताद नहीं वीरान नहीं आवबाद नहीं ।
द जितनी वाते दुनि फ सभ भूल गये कुछ याद नहीं ॥
जो आशिक हैं? ॥९॥
मंत्री--( राजा की ओर देखकर ) देखिये राजन् केसा गधे की
भांति मुँह फाइकर रंक रहा है ।
राजा--अजी कुछ नदी सरासर शं े धूल फेंक रहा है ।
विदृषक--मानों फोओं में हंस फंस रहा है ।
राजा--वावा, अगर ऐसे दी संतोषी हों तो दर २ मारे २ क्यों
फिरते हो †
साधु-श्रच्छा वावा ( यह् कह कर मुस्कराते हुये चले जाना )
राजा--(मंत्री की ओर देख कर ) देखा आपका क्रोध ।
मंत्रीं--टलने दो ऐसे अकड़खां को महाराज ।
(इतने में शत्रि के नो बजे का घंटा बजा )
शजा--ओंहो | ( नो वज चुके चांदनी रात के कारण समय
जान नहीं पढ़ा अब चलना चाहिये। ( यह सुन कर सब
उठ कर चलते हुये )
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