तूँ ही बाती तूँ ही जोत | Tu Hi Bati Tu Hi Jot

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Tu Hi Bati Tu Hi Jot by साध्वी ललिता - Sadhvi Lalita

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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८-अहो भगवन्‌! तमस्काय मे गाज, बीज, बादल, बरसात कोन करते है? हे गौतम! देव, असुरकुमार, नागकुमार करते है । ९-अहो भगवन्‌! क्या तमस्काय में बादर पृथ्वीकाय ओर बादर अद्निकाय है? हे गौतम! नहीं है, परन्तु विग्रहगति- समापन्न (विग्रहगति करते हुए) बादर प्रथ्वीकाय ओर बादर अग्निकाय के जीव हो सकते दै । १०-अहो भगवन्‌! क्या तमस्काय मे चन्द्र, सूर्य, ग्रह नक्षत्र, तारा हैं? हे गौतम! चन्दर, सूर्य आदि नदीं हँ किन्तु तमस्काय के पास मेँ चन्द्र-सूर्य की प्रभा पडती हे, परन्तु वह अप्रभा सरीखी है। ११-अहो भगवन्‌! तमस्काय का वर्ण कैसा है? हे गौतम! तमस्काय का वर्ण काला भयंकर, डरावना हैं। कितनेक देव तमस्काय को देखते ही क्षोभ पाते है ओर अगर कोई देवता तमस्काय में प्रवेश करता हे तो शरीर ओर मन की चंचलता से जल्दी उसको पार कर जाता ই। १२-अहो भगवन्‌! तमस्काय के कितने नाम हैं? हे गौतम! तमस्काय के *१३ नाम है-१ तम, २ तमस्काय, ३. अन्धकार, * यहों तमस्काय के १३ नाम कहे गये हैं। उनका अर्थ इस प्रकार है-१. अन्धकार रूप होने से इसको “तम” कहते हैं। २. अन्धकार का ढिगला (समूह) रूप होने से इसे “तमस्काय' कहते हैं। ३. तमो रूप होने से इसे अन्धकार कहते हैं। ४ .महातमो रूप होने से इसे “महा-अन्धकार ' कहते हैं। ५-६,लोक में इस प्रकार का दूसरा अन्धकार न होने से इसे “लोकान्धकार * और “लोकतमिस कहते हैं ।७- ८, तमस्काय में किसी प्रकार का उद्योत्त (प्रकाश) न होने से वह देवों के लिए भी अन्धकार रूप है, इसलिए इसको देव-अन्धकार और देवतमिस्त कहते हैं।९ . वलवान्‌ देवता के भय से भागते हुए देवता के लिए यह एक प्रकार का जंगल रूप होने से यह शरणमूत्र है , (११)




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