कला का विवेचन | Kla ka Vivachan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
210
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)९५ चूलालिया जायता भो सम्यताकी आवश्यकतायें क्या कुछ कम
महत्त्वपूर्ण हैँ । चिरविकासशील सम्यताकह्ा पालन न करने
आवश्यकता समकक्तर सनुष्प सदाचारक्ा अभ्यास करता है और
छस्यास-परंपरासे वह उसके शारीरिक तथा सानसिक संगठनक्ा
अविच्छेय जंग चन जाता है 1 रिरि ते जिस प्रकार पंकसे पंकज की
उत्पतति दाठी है. उसी भ्रक्ञार शारोरिक इत्तियेंखे मलुप्यदी उदात्त
इतिय का उन्मेष छोकर कालान्तरमें परमशाभन रूप घारण करती हैं।विदाने एक तोरा वनं “कलाक्ते लिये क्लाका› सिद्धान्त
उपस्थित करता रै ओर आचारन्ति च्लाक्ते बाहरी वस्तु ठहराग
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