अन्य धर्मापेक्षा जैन धर्मातील | Anay Dharmapeksha Jain Dharmatil

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
532 KB
कुल पष्ठ :
42
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)११पयाय ( स्थिति ) खूप शब्द युक्तया आपल्या
न्याय प्रंथांत [सिद्ध करून दाखबिलें, स्याच्याच-
विषयीं आज सायन्सनें आविष्कार केला भद्दे का;
राब्द परमाणचाच एक स्थिति आद्वे. या आधा-
रावर् त्यानें शब्दांस यंत्रदारा धरून टेर्लाग्राफ वगेरे
दारा हजारों मेलापयंत लंब पोहांचरिण्याची
व्थवस्थाद करून दाख्विटी अ!हे, प्रकारा आणि
अधकाराविषयीं कोणत्यादही दशनानें खुलासा केला
नाही, परतु जन धर्मानें याविबयी स्पष्ट सांगेतर्डे
आहे कीं; प्रकाश आणि अंधकार पुद्दल परमा-
ण चाच विशेष स्थिति अहि. सथ, दीपक, कंदर,
अघ्नि कभरेन्या निमित्ताने त्या पएमाणूत जब्दां
पादश सा चउन जाता, नन्हां प्रकाड होतो, ज्या-
वें सूय बगैरेचे कारण नाहींसे होतें, तेब्हां
পালা হ্যা काछा होइन अधकार बनवून दते,
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