कर्मग्रन्थ [प्रथम भाग] | Karm Granth [Part १]
श्रेणी : जैन धर्म / Jain Dharm
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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
9 MB
कुल पष्ठ :
302
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पृष्ठ
गाया १५ ७२-७८
जीव आदि नवतत्त्वों के लक्षण छ२
सम्यकृत्व के भेद और उनके लक्षण ७६
गाथा १६ ७८-८१
मिश्रमोहनीय की व्यास्या और दृष्टान्त ७६
मिथ्यात्वमोहनीय का लक्षण व भेद ७६
गाया १७ च १८४
चारित्र मोहनीय कर्म के भेदोके नाम . ८१
জান मोहनीय के भेद, लक्षण और उनके चार प्रकार होने के कारण ठर
अनन्तानुवधी आदि कपायो के लक्षण ८२
नोकपाय मोहनीय का लक्षण ठ
गाया १८ ८१५-८६
अनन्तानुवधी आदि कषायो की काल मर्यादा ८६
अनन्तानुवघी आदि कपायो से वचने वाली गत्तियो के नाम ८६
उनन्तानुवधी जादि कपायो द्वारा होने वाला कायं ८६
गाथा १६, २० ८७-८६
अनन्तानुवंघी आदि कपायो से युक्त आत्मपरिणामो के दृष्टान्त ८७
गाया २९१, २२९ ६०-६३
नोकषाय मोहनीय. के भेदो के नाम गौर उनके लक्षण ६०
गाया २३ ६४-६८
आयुकर्म का लक्षण और उसका कार्य ९४
अपवतंनीय--मनपवतनीय आयु के लक्षण ६५
आयुकमं के भेदौ कै नाम ओर् उनके लक्षण ` , ६७
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