हिमाचल प्रदेश के घटना और श्रम प्रधान गीत | Himachal Pradesh Ke Ghatna Aur Shram Pradhan Geet
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
178
श्रेणी :
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एम आर ठाकुर - M. R. Thakur
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)झौर नाहन के भमियान की सफलता के लिए प्राथना की गयी ॥
भगर नाहन से लडाई जीत कर वापस ्राऊ,ই বধ! बडे बकरे के साथ तेरे मादिर मे' भाउ गा ।इस पर मिया बार-बार कहवे लगा,भण्डार से सुसाने को बारूद बाहर डालो +युवा सेना घ डोरी के मां दर प्रायण में आईएक दूसरे को भ्रभिवादन का प्रादान प्रदान करने लगे ।होकू की सेना कण्डारी की पवत चाटी से होकर मिकली
कष्डारी से मिया (होवू) धडोरी की हरसत भरी नजर स देखता है |
जीरी भीभमणी (लातत रग के उत्तम चावल) व युवा संस्त का दूध छूट गया
घडोरी की जम भूमि व कलम के उपजाऊ खेत बिछुड गए।
रावत तेरी बुद्धि पर मोह माया, फा पर्दा क्या पड रहा हैजा रहा युद्ध के लिए व याद कर रहा है दूध को।जमदे मी श्रोर घलते-चलतेभाध रास्ते में उसे टुडे उलिया का हाट मिला ।सन ही मत होकू रावत सोचने लगा,हाथिए नाहन के समाचार क्यौ नही सुताते 1नाहन की बातें तो बडी खोटी हैंनाहन मे तो दोलू मेहते की तूती बोल रही हैदाई के फूल सिल गए हहोकू मिया सेना सहित जमा ग्राम तक पहुच गया।हाथ जोड कर देवी से भज करने लगाश्रौर देवी से परामश की प्राथना की ।जमठे की देवी की प्राथना करने लगामाता हार का मुह ते दिखवाना।इस भ्ोर नाउणी उस पार ग्राम चेलीश्रगर विजयी रहा तो बकरे की बलि चढाउगा 1जमटे की देवी मे कोई हलचल नही हुईलोटा पानी का गिराने पर भी उसने बकरा स्वीकारं नही किया,
मिया (हाकू) को राजपुती भाई (खून खोल गया),उसन जूते सहित देवी को लात मारी ।दवी जो तेर मन प्राये करना,राजा के विरुद्ध मैं श्रवश्य ग्रुद्ध जांतु गा ।

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