हिमाचल प्रदेश के घटना और श्रम प्रधान गीत | Himachal Pradesh Ke Ghatna Aur Shram Pradhan Geet

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Himachal Pradesh Ke Ghatna  Aur Shram Pradhan Geet by एम आर ठाकुर - M. R. Thakurरमेश जसरोटिया - Ramesh Jasrothiaवशीराम शर्मा - Vashiram Thakur

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एम आर ठाकुर - M. R. Thakur

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रमेश जसरोटिया - Ramesh Jasrothia

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वशीराम शर्मा - Vashiram Thakur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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झौर नाहन के भमियान की सफलता के लिए प्राथना की गयी ॥ भगर नाहन से लडाई जीत कर वापस ्राऊ, ই বধ! बडे बकरे के साथ तेरे मादिर मे' भाउ गा । इस पर मिया बार-बार कहवे लगा, भण्डार से सुसाने को बारूद बाहर डालो + युवा सेना घ डोरी के मां दर प्रायण में आई एक दूसरे को भ्रभिवादन का प्रादान प्रदान करने लगे । होकू की सेना कण्डारी की पवत चाटी से होकर मिकली कष्डारी से मिया (होवू) धडोरी की हरसत भरी नजर स देखता है | जीरी भीभमणी (लातत रग के उत्तम चावल) व युवा संस्त का दूध छूट गया घडोरी की जम भूमि व कलम के उपजाऊ खेत बिछुड गए। रावत तेरी बुद्धि पर मोह माया, फा पर्दा क्या पड रहा है जा रहा युद्ध के लिए व याद कर रहा है दूध को। जमदे मी श्रोर घलते-चलते भाध रास्ते में उसे टुडे उलिया का हाट मिला । सन ही मत होकू रावत सोचने लगा, हाथिए नाहन के समाचार क्यौ नही सुताते 1 नाहन की बातें तो बडी खोटी हैं नाहन मे तो दोलू मेहते की तूती बोल रही है दाई के फूल सिल गए ह होकू मिया सेना सहित जमा ग्राम तक पहुच गया। हाथ जोड कर देवी से भज करने लगा श्रौर देवी से परामश की प्राथना की । जमठे की देवी की प्राथना करने लगा माता हार का मुह ते दिखवाना। इस भ्ोर नाउणी उस पार ग्राम चेली श्रगर विजयी रहा तो बकरे की बलि चढाउगा 1 जमटे की देवी मे कोई हलचल नही हुई लोटा पानी का गिराने पर भी उसने बकरा स्वीकारं नही किया, मिया (हाकू) को राजपुती भाई (खून खोल गया), उसन जूते सहित देवी को लात मारी । दवी जो तेर मन प्राये करना, राजा के विरुद्ध मैं श्रवश्य ग्रुद्ध जांतु गा ।




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