अघमर्षण द्विजराज | Aghmrshan Dwijraj
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
66
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)षরঙ(११)दयेपरामनीचामेद्राणांस्तोमोयेन्येाःसन्तोत्ा-
त्यांप्रवसेयस्तएतेन यजेरन् ॥इस्का अथे यह हं कि লাল সন্ত कामी सरकार व्रा-
तस्तोम यज्ञसे होसक्ताहै। जब संस्कार करने को कोई पण्डित
से भायश्रित्त करने को पूछे तो पण्डित उप्तकों उसके छायक
ओर समय के अनुझूल प्रायश्वित्त वतकावे नसे किअसमर्थस्य बालस्य पिता वा-यदिवा गुरुः
यम॒दिश्य चरेद्धम पापं तस्य न विद्यते ॥ २२ ॥
अशीतियेस्य वर्षोणि वालोवाप्यनपोडरशः ॥ आ-
यथित्तादमहेन्तिखियोरोगिणएवच ॥ ইহ
इति आङ्धिरसस्खतिः।तथाच-श्ुधाव्याधितका-
यानां प्राणों येपां নিব ॥ येन रक्षन्ति
वक्छारस्तेषांतक्किल्विपंभवेत्॥ह.पूर्णेऽषेकालनि-
यमेनशद्धिब्रोह्मणेविना। अपर्णेष्वापिकांलेपशोध-
यंतिद्धिजोत्तमाः † १०} समाप्मितिनोवाच्यं
त्रिपुवणेंपुकहिंचित्॥ विप्रसंपादनं कर्मडतनचचेषरा-
णसंशये ॥ ११ ॥ संपादयतियेविप्राः स्नानंती-
थफलप्रद॑ ॥ सम्यक्षतुरपापंस्थाइृतीचफलमाप्तु
यात् ॥ १२ ॥ इत्यापस्तंवस्मृतिः अध्यायः३ ॥
इनका अथ यह दे कि-जिस असमथ बालक के बदलेषिवा वागु जो भायवि् करे उस लड़के का पाप नह
हाजाता हैं अयीद ছিনা वा गुरु द्वारा उस लड़के का प्राय-
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