बिन्दो का लल्ला | Bindo ka Lalla

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image :  बिन्दो का लल्ला  - Bindo ka Lalla

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
, बिन्दोका लला | ९५ बिन्दोने,पूछा, “ नरेन्द्र; किस क्लासमें: पढ़ते हो बेटा !, ¢ नरेन्द्रन कहा; फोर्थ क्लासमें । रायछ- रीडर, .आमर, जियोग्राफी,, अरथ- 'मेटिक--और भी कितनी ही चीजें हैं डेसिमेल ठेसिंमेल,. सो सब ;तुमः “संमझोगी नहीं, माई 1 + हाल, एरोकेशीने गर्वके साथ अपने पुत्रके चेहरेकी तरफ ,देखकर।बिन्दोसे कहा : “अरे एक-आध किताब थोड़े ही है छोटी बहू, कितांबोंका पहाड़ ই, . किंता व्रक्ससे निकालकर अपनी मेहिर्योक्रो जरा दिखा तो देना वेट; : नरेन्द्रने सिर हिछाकर कहा, “/ अच्छा, दिखाऊँगाव ? :, हि बिन्दोने कहा, “४ पांस होनेमें तो अभी देर है।? «८. ,.... एरोकेशीने कदा, ¢ देर रहती थोड़े ही छोटी बहू, देर नहीं रंहती;। अब तक एंक ही क्यों, चार चार पास-हो जाता । सिर्फ कलमुहे मास्टरकी :वजहसे ही नहीं हो रहा है । उसका सत्यानाश हो जाय, मेरे-छालको- वह कैसी रंकी निगाहसे देखता है, सो वही जाने-। इसको वह दरजा'->चंढाता थोड़े ही है, चढ़ता नहीं । मारे जलनके वह बरसके बरस उसी एक हीः किल्यसमें ' पड़ा रहने देता है। ” | #. - बिन्दोने विस्मित होकर कहा, .“ नहीं- तो; ऐसा..तो नहीं होता 1? एटोकेशीने कदा; “^ खरासर :हो- रहा है, होता. क्यों नहीं ! मास्टर सब-एंका करके घूस चाहते हैं। मैँ.गरीब ठहरी, घूसके रुपये कहाँसे छाऊँ, बंताओ १.२ बिन्दु:चुप रही। अन्नपूर्णानेः:छुदयसे दु/खित . होकर-कह्ा; “ इस: तरह - भला कहीं आदमीकेः पीछे गा जाता हैः यह क्या अच्छा;काम है ?-लेकिन हमारे यहाँ ये सब बातें-नहीं हैं ।:हमारा छल्ला লী दर साल. अच्छी अच्छी पफिताब इनाम पाता है, मेगर कमी घूस-फूर्स कुछ नहीं देनी पड़ेती 12? इतनेमें अमूल्य -कहींसे आकर ::घीरे-से- अप्रनी छोटी-माकी गोदमें:वैठ गयाः बैठते: ही छोटी: बहूके गलेमें बॉहः डालकर-कान ही कार्नमें . बोला; “४ करू रविवार है,छोटी: मा, आज मास्टरजीकी चले जानेके.लिए.कह दो न. 7: बिन्दुने इंसकर कहा, :“ इस लछड़केको देख. रही हो बीबीजी,. इसे :कहानीः ' खुननेकों .मिछ जाय,:तोः फिरःउठना किसे कहते हैं जानता-ही नहीं,--कदम मास्टरजीसे कड तो ज, लहछछा आजः नदींःपदेगा 1 ? ` ~. ~ नरेंद्धने आश्रर्शृ॑-्वकित होकर कदा. «यह क्या रे अंभूल्य,/ इतना बड़ा डोकर अब भी औरतोंकी गोदमें जाकर बैठता है १”.




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now