वे बेचारे | Ve Bechare

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Ve Bechare by फ. मि. दोस्तोयेव्स्की - F. Mi. Doestovsky

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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करते हो, लेकिन तुम रईस तो नहीं ही हो न ! भ्राज सवेरे सोकर उठी तो तबीयत बडी उमंग में रहो*“मन खुशी से खिला रहा“ फेदोरा बहुत देर तक काम पर रही है, भौर मेरे लिये भी काम ले आई है । मजा श्रा गया: “मैं फ़ोरन जाकर थोड़ी-सी सिल्क खरीद लाई-.-प्रीर फिर लौटकर काम पर बैठ गई ““सारी सुबह मन फूल-सा हल्का रहा“ रह-रहकर मुस्कराता रहा“लेकिन इस, समय फिर मन पर बोझ भरा गया है, भौर चारों श्लोर से उदासी घिरो श्रा रही है। प्राखिर मेरा क्या होगा ? भविष्य के गर्भ में मेरे लिए क्या है ? परनिक्चय. की परिस्थिति मे जीना किसी तरह की कोई सम्भावना ध न देखना, और भविष्य की दूर-दूर तक कोई कल्पना न कर पाना, सचमुच कितना दुखदाई है! औौर, अतीत की वात करो, तो वह भी इतना -भृयानक रहा है कि सोचने-मात्र से कलेजा दूक-दूक होने लगता है। कुछ बदमाश लोगों. ने जिस तरह मेरी जिन्दगी वरवाद कर दी है, उसके कारश लगता है कि जिन्दगी केभ्राखिरी दिन तकर््रास बहाने पड़े गे । लेकिन, श्रेपेरा बढ़ रहा है भौर श्रव मुझे काम लेकर बैठ जाना 'चाहिये ।***मै तो जाने कितना लिखती, मगर समय जो नहीं है । काम जरूरी है, श्रौर जल्दी करना है 1 ष लिखना वैसे बुरा नहीं है, श्रादमी को प्रकेलापन महसुस नहीं होता“ लेकिन, तुम कभी यहाँ श्राते क्यों ` नही ? सचमुच यहाँ श्रात्रे क्यों वहीं, मकार-प्रलेक्सेयेविच जगह दूर नही है,, और समय भी निकाला ही जा सकता है । देखो, जरूर श्राश्रो यहां किसी-न-किसी दिन । ` र्हा तुम्हारी तेरेजा से श्रभीःश्रभी भेटं हुई थी । लडकी इतनी वौमार . लगीं कि मुभे बहत. ही तकलीफ़ हुई श्रौर मैंने उसे बीस कोपेक दे दिया । এ श्र हाँ, मैं तो भूल ही गई““तुम मुझे विस्तार -में लिखो कि तुम कैसे समय काटतं हो, किस वरंह जीते हो; तुम्हारे साथ- रहनेंवाले कैसे हैं, श्रौर तुम्हारी उनसे कैसी बनती हैं ? मैं-सभी कुछ जानना चाहती हूँ। वे बेचा रे“ /१३




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