बंगाल का काल | Bangal Ka Kal

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Bangal Ka Kal by अज्ञात - Unknown

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
बंगाल का कान यह चदा तो थोडा ही है, 'सिहानियाँ पद्मपत की सब, खेतानो को औ' बिड़ला की, साराभाई, डालमिया की, वालचद की, हुकुमचद की, हिज़हाईनेस आगा खाँ की, সী” निज्ञाम की, जो कि सुना जाता है सबसे धनी व्यवित हैं इस दुनिया के, और चचा इन सवके कारं ओर लकडदादा कुबेर की सारी दौलत भी मिल जाए, तो हे बग देश के मूखो, ' नही बचा तुमको सकती है 1 तुम्हे जानना है मनुष्य तुम भर नही कीचड के कीडे जो आहार तथा मैथुन कर




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now