प्राचीन राजस्थानी गीत | Pracheen Rajasthani Geet

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutShri Mohanlal Vyas Shastri
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
132
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about श्री मोहनलाल व्यास शास्त्री - Shri Mohanlal Vyas Shastri
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्राचीन रातम्थानी गीतआअर्ग:-आशा फवि, कहता है कि सेरा मन उस माधव में ला
लगा है, जिसे मघुसूदन, मुरारी, नारायण, शमिह, दामोदर और दाता
कहते हैं. ।(जिसे ) सत्यमामा और रमा का प्रेमी शिव एवं अह्याका
स्थासी, सीता और रव्मिणी का पति, शोवल्लभ पुकारते हैं.।( जिसे ) एथ्वी फो दाद़ों पर रखने चला, कर्य में शंख, चक्र
और पद्म धारण करने बाला, शेप एवं जलशायी, जगन्नाथ-+लंका घिजयी, नर्दों प्रहां को सुक्त कराने बाला, काली नाग का
नायते वाला, रावण फे दसो मस्तक काटने वाला, श्रीपति और श्रीराम
कहते हैं. ।( जिसे ) केशब, झृप्ण, कल्याण स्वतप, कसारि, ऋपालु, उद्धार
कनी, वामन, विपु, विदल मनमाली कदते ह 1( जिसे ) श्याम, द्म, पीताम्बरधारी, सर्प को नथने बाते,अदूभुत बलशाली और हएशथ्वी तथः थआाकाश का आश्रय कद कर लोग
पुफारते हैं.रचयिता--ईशरबरदास बारहट'
| मभीत ४ শোबढ़ पाखे वेद न कीज़, कीबो जिम ग़मय कौजें।
ब६ नामी प्से दीसे, रे लझ्गद किएद्दी न लीमे ॥१॥१-+ ये ऐड्डिश शाक्षा के पररु हरि परम सक्त हो इक हैं। थे प्ले माजाई
पीकददं परे गह रहे। हक रब पन्दः--*दृ्िमिए ( होशा-
User Reviews
No Reviews | Add Yours...