बात का बतंगड़ | Baat Ka Batangad

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : बात का बतंगड़  - Baat Ka Batangad

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
बात का वतड़ुड़ ४ हौडियस--लियेजनेटो ! (देखो यह में खड़ा हूँ। चह राजा. हैं! यह उनके भाई हैं! ग्रौर यह हीरो का मुँह ই? लियोनेटो--यह ते। सब कुछ है, फिर कया ? छौडियस--मैं आपकी लड़की से एक वात पूछता हैँ। आप इसका ठीक-ठीक उत्तर इनसे दिला दीजिए | लियोनेटो---वेदी |! सच-सच कह दे। हीरो--इश्वर मेरी रक्षा करे ! किस प्रकार का प्रश्न है ? कीडियस---पअ्पसने माम को धब्बे से बचाओ। ! हीरो--सेरे नाम पर कान घव्चा लगा सकता है ? छौडियस--हीरे दी हीरो के नाम पर धव्बा लगा सकती है। ह कान आदमी था जिससे ठुम कल रात बारह श्र एक बजे के भीतर खिड़की मे द्वोकर बातें कर रही थी ९ अगर तुम सती हो ते ठीक-ठीक बताओ ! दीरो--उस समय भै किसी से वात नहीं करती थी। पीडरा--फिर ता तुम सती नही हो। । लियोनेटो, सुने ! मैंने, मेरे भाई ने, श्रार इस मेरे दुखिया सित्र ने इसका एक झादसी के साथ बातें करते देखा ओर सुना, श्रीर उस दुष्ट ने निलेज्ज होकर साफ-प्ताफ कद्द दिया कि सहस्तों बार हमसे वातचीत हुई है। जान--घिक्‌! धिफू! घिकू! महाशय! रहने दीजिए ! चे वाते कहने योग्य नहीं हैं। हीरो! मुझे झ्रापक इस अ्रसतीत्व पर शोक रै!




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now