श्री प्रवचनसार टीका (तृतीय खण्ड) | Shree Pravachansaar Teeka (Tritiya Khand)

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Shree Pravachansaar Teeka (Tritiya Khand) by मूलचंद किसनदास कपाडिया -Moolchand Kisandas Kapadiya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१३) “ २१ ख्रियों सियोके ४ ठीक नदी . ठीक ही ७ पुजनावाना पूजा पाना ३ अचार्य आचाय ৫ अग्रहों आग्रहो ट ঘুম ঘন १४ विरुद्ध हो विरुद्ध न हो १५ यारीरादि शरीरादि १९ व्यतिरेक्त व्यतिरेक १८ सजोगे सजोगे १६ चलाता है चलता है १९ आत्माके आत्माको ६६ परिणामन परिणमन ४ स्वानुभाव . स्वानुभव ५० ক্লে इष्ट १ समय सगय॑ হু विराये विरमे ८ >€ हवे ) वह्‌ आचरण १२ उपाध्याय उपाध्याय साधुमें नो प्रीति १९ क कब होता २१ कमी है इससे कमी होती है तो १६ आदश आदेश १९ बने पने




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