भक्तमालमाहात्म्य | Bhaktamalmahatmya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भक्तमीर सटीक ॐ *ड 1 0 ॥ यथावरन्विस्सत्स््व पिहाहिवारभ. अथवा भत्ति अग भक्तमाखही से है भदा सुर्वो्मि'मदावरभुटकयासेपरी किंत मननसुचीर चतुरंभुज दासिकी सनी दिया केवलराम' सौंटी पीडिमें उपटेंया ६ नंवन गों- पेलिदास जौवेिरी पंत राजा आशंकरनें'नांस झाभरणअन्तनिष 5 हर्सिंबी रलांवतीरॉनीं ८ साधसेवा 'सदाघती ' सानती 'रंघर्नाथ शॉसीई संत्सभ रालिमक्तः 8: चाहवारी सवुगोंलाई १४ ॥ १० तु ?मक्तिपचरस, ॥' शातदास्यसर्ख्यवातिसंल्य आग 'रुलाइंपराचो-रससार विततारनीकें गांव हैं ।.ीकाको चप्रतक्रीरजानभि.द्विचारिमन इतक्-स्वषूप म-अन्‌परे दिखियेडेंगजिंसकेस 'अश्पीतपुंछकितगातंकहुंतिनू :कोमबविसिडवोरेसोछकायेहैं। जोजोरदेदूरिरहे विभुता ' पूरि हियोहोसचरियेरिनेकुश्व॑रलिंगायिह' ४ पंचरससोइ | परथि पीकपहराइबेंकाराविकलसाइड। धरे : जपताडिरमभांविवती अखिनारमिनिस लाइअभिसमंियाम हर तिल चाद १ -धारीररप्यारीकिहकरतम््यारीमह्‌। कै | दृतामातिन्याशदरपार्यनकाञ्ा इह माकर बभार तत ` चमिर्त्गारदयेतंहोतमशंर्सजोदयतिंजानिपादहेः 10 भर्सिपचरसषः॥ सोभक्तिको. स्वप क्रियात्मक -सों क्रिये हीति जानी जहे ¶ भागवते ॥ देवानागुणरिङ्गानामातुभवि ककम्भणम्‌ ॥ संखएवेकमनतो वाचः सामात्या '९ अन -नितताभीरावती भंिःसिदधेगरीयतसीः॥: जरपतयादुधाकारा निमी पमिनलीयंथार जैसे रसन में डान्द्रियवा भाविकाहां चले है एस: ' हीं समस्तः इन्दि भसि स्वाभाविकीं रगे या क्ियतिं नक्त , जीना दै सो भक्ति पञ्वश्रकारको. वणन्‌ क ह. ज इषा ` रपं संहि ईर मिथीं कन्दं आजा स्वाद न्यारे न्यार तत्व एक र शा




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