श्रीवाराहपुराण भाषा | Shivarahpuran Bhasha

Shivarahpuran Bhasha by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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$ व + श्रीवाराहृपुराणं माषा। ११ जो पुरुष तुमने देखा है. सो थजुर्वेदरूप महाबली ब्रह्माजी हैं. क ४ 0 मवेदसूप | उनके हृदय में जो पुरुष तुमने देखाहे सो शुक्रव्स सामवेदरुप: रुद हैं वे. सय के तुल्य स्मरण करनेवाले का पापरूप महान्धकार नाश करते हैं ये तीनों वेद त्रह्मा,विष्ण, रुद्र मर्तिहिं और अकार, . ` उकार, मकार रूप हैं यह संपूर्ण भलीमांति हे नारदजी ! हमने वर्णन किया और ये वेदशाखयोगादि जो कि हरण कवि सोः सपण लो यंह जो महासर कमलां से सुशोभित है इसमे स्नानः करो यह वेदमयी जलसे मराद जिसमे स्नान करने से अनेक -पातकां से निढत्त होके सिद्धि को प्राप्त हृ्ा २ नाना जन्मोकाः स्मरण होता है नारदजी बोले हे राजन्‌ ! यह कहके कन्या तो. अन्तर्धान भ॒ र हम्‌ स्नान करे सये सिचिको प्राप्त हो तुमः को देखने को यहां खाये ॥ ` 2 ¦ `. ` तीसरा श्रध्याय॥. ` राजा प्रियघ्रत बोले हे नारदजी ! आपकी मधुरवारी सुनके हमको अत्यन्त हर्ष ह ञ्मा अब हम सुना चाहते हैं आप त्रिकां लज्ञ हो ओरे जन्मों में जो २ आपने चरित्र देखे हैं सुख दुःख , किये हैं सो कहो नारदजी बोले श्रीमहाराज ! सावित्रीके वचन 'सुनके उस वेदसर में जब हमने स्नान किया. उसीसमय अनेक जन्मोका स्मरण हरा तंबसे हम अनेक जन्मांका टत्तान्तःदेखि रसे अनन्द जिस आनन्दं का पारावार नहीं जव राप साव्‌- धान्‌ हो जन्मान्तर का उत्तान्त सुनिये हे राजन्‌ | पूवेजन्म में हम अवन्तीनाम्‌ पुरौ मे अथात्‌ उजयनौ मं ब्राह्मणक पत्रमये सारस्वत हमारा नाममय वेदं बेदाङ करके युक्त बहुत धनाढ्यं रूपवान्‌ होके कु काल घर मे कुलोचित . धम पालन्‌ करते ९ कालक्षेप किथा किसी समय एकान्तम वेढे शोचते २ ऐसी बुद्धि उत्पन्न भई कि संसार असत्य है श्औौर देह क्षणमंगुर है तब तों




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