मणि रत्नमाला प्रारंभ | Mani Ratanmala Prarambh
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
243
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)नित्य नित्य नवला नेदृथ्री, नमन करूं गुरुराय !
मेहेर करो मुज घपरे, कारज सब ही धाय.
अरिहंत ज्ञान अंत छे, जाकों न लहिये पार,
किंचित् बुद्धि साधने, करं हुं तास विस्तार.
सूत्र-प्रंथ बहु वांचतां, विध विष दरंका धाय;
समाधान तेनु करं, ज्ञानो तणा पसाय.
को$ सूत्र कोई अमे, को प्रकरणएमें जोय;
को सज्ञनसै धारिय, प्रश्नोत्तर अति सोय.
स्थिर विन्ते विवेकथी, वाचे तों फढ होय;
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नधौ पूणता अही कदी, दोष न देशों कोय,
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