असन्तोष के दिन | Asantosh Ke Din

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : असन्तोष के दिन  - Asantosh Ke Din
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about राही मासूम रज़ा - Raahi Masum Rajaa

Add Infomation AboutRaahi Masum Rajaa

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
“मराठी 1” साजिद गनगना गया--“”आई हेट मराठी ।” बह क्यो भई 1” “विकाज भाफ यहकरि मराठी ने तो हाईस्कूल म मेरी पुिशन खराब की ।” * औनली मराठीज ऐपियर आन द मेरिट लिस्ट ।” फात्मा ने फसला सुना दिया । 'ट्रासलेट,” अब्वास ने कहा । सिफ मराठिया के नेम्स ओह हैल नाम मुझे नहीं मालूम कि मेरिट लिस्ट को हिंदी उर्दू मे क्या कहत हैं ।” मुझे भी नही मालूम 1” अब्बास ने कहा 1 फात्मा खिलखिलाकर हँस पडी और उसके गले मे बाँहे डालकर प्यार करन के बाद बोली । मैं सोने जा रही हूँ ।” “एमज्जू ” सयदा ने फरियाद की । “खुदा के वास्ते यह मिनी र्ती बाद करो, गोलमाल' लगा दो 1” माज़िद मे सुना ही नही । वह वावमेन' पर उस्ताद अमीर अली खा का भहीर भेरव सुनन में लग चुका था । कामो पर ईअर फान चढा हुआ था | खुद सयदा भी कालीन पर लेटकर युपमा मे छपी हुई तस्वीरें देखने संगी क्योकि देवनागरी लिपि वह जानती नही थी ।' यार एक हो जाये ” एकदम से अब्वास को प्यास लग गयी ।“कोई जरूरत नही 1 ' सयदा न डाटा। 'कफ्यू यू ही लगा हुआ है ।'वह हँस पडा । “कपयू को चाय से क्या लेना देना भई !”दरवाज़े से पीठ लगाये जया भादुडी और अशोक कुमार के सीन पर बाकायदा रोता हुआ राम माहन उठ खडा हुआ ।अयास देख सकता था कि राम मोहन दिल मार के चाय बनाने उठ रहा है कि बहू अभी जया भाठुडी और अशोक कुमार के सीन पर औरअसन्तोयवे दिन / 17




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now