आधुनिक हिंदी नाटक | Adhunik Hindi Natak

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Adhunik Hindi Natak by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१२१: जयशंकर प्रसाद के नाटकों में संगीत पिपासित हृदय का कोमल उच्छवास है तथा एक गीत नर्तकियों द्वारा गाया गया है । उपर्युक्त विवेचन से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्रसाद के नाटकों में भी पूरं युगो के समान गीत-पक्ष की प्रधानता भर वहुलता है । अधिकतर नाटकों में गीत- संख्या अधिक है । इसके दो ही कारण हो सकते हैं--एक तो यह कि प्रसाद प्रचलित परम्परा से मुक्त नहीं हो सके हैं । भारतेन्दु-युगीन नाटकों तथा पारसी कम्पनियों के नाटकों में गीतों के अतिरेक का प्रभाव उन पर भी पड़ा हैं । दूसरा कारण उनके कवि हृदय की भावुकता तथा संगीत के प्रति उनकी रुचि है जिसने उन्हें गीत-रचना के लिए विवश कर दिया । गीत-वाहुल्य के इस दोष को प्रसाद अपने अन्तिम नाटक से ही दूर कर पाए हैं जिससे यह संकेत अवश्य मिलता है कि उनके मस्तिष्क में भी गीत-संख्या के आधिक्य-दोष का प्रष्न उठ चुकाथा। प्रसाद के नाटकों में गीतों के इस विकास क्रम को देखने के उपरान्त यह भी ज्ञात होता है कि उनके नाटक-गीतों में दो प्रकार के गीतों का अत्यधिक महत्व है-- श--नूत्य-गीत, र२-नेपथ्य-गीत 1 नाटकीय सौन्दर्य एवं संगीत की दृष्टि से ये दोनों प्रकार के गीत विक्षेष उल्लेखनीय हं. अतएव इनका विवेचन प्रथक्‌-प्रथक्‌ किया जायगा । नृत्य गीत ; नृत्य-गीत प्रसाद के नाटकों का जाकर्पंण है । प्राय: सभी स्थलों पर नृत्य के साथ उन्होंने गीत का प्रयोग किया है जो वातावरण को परिस्थिति के अनुरूप भर अधिक प्रभावशाली वना देता है । नृत्य-गीत उनके सभी नाटकों में उपलब्ध नहीं होते हैं । केवल विशाख , अजातशत्रु , “जनमेजय का नागयज्ञ', “कामना”, “स्कन्दगुप्त” भौर “घ्रुवस्वामिनी' मे नृत्य-गीतों का प्रयोग हज है। कुल मिलाकर बारह नृत्य-गीत प्रसाद ने लिखे हैं । चार नृत्थ-गीत केवल “*विशाख' नाटक में ही हैं इसके अतिरिक्त दो अजातशत्रु में, दो “कामना' में, दो “स्कन्दगुप्त' में तथा *जनमेजय का नागयज्ञ” एवं घर्‌ वस्वामिनी मे एक-एक नृत्य-गीत है । इस प्रकार विकास-क्रम की दृष्टि से धीरे-धीरे नृत्य-गीतों की संद्या कम होती गयी हे । ` मुख्यतः केवल तीन प्रकार के पावर इन नृत्य-गीतों के सायक हँ-सखियां, नतकी आौर्‌ पुरुष पात्र । अधिकतर नृत्य-गीत सक्ियां ओर नर्तंकियों द्वारा ही गाए गए हैं । पुरुप पात्र में केवल कामना नाटक मे विलास एक नृत्य-गीत याता है ।' सखियों औौर नर्तकियों में से भी अधिक नृत्य-गीतों की. गायिकायें नर्तकियां हैं । सखियां तो विशाखः नाटक में विशाख ओर चन्द्रलेखा के प्रणय व्यापार को लक्ष्य कर दोनों को घेर कर नाचती हुई गाती है 1 सचिवों हारा गाया गया अन्य इसी प्रकार का नुत्य- श-कामना : प्र० अंक : पृ० शेर । र-विशाख : द्वि० अंक : पूु०४५॥




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