मैं तुम्हारा स्वर | Main Tumhara Swar

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Main Tumhara Swar by मंगल सक्सेना - Mangal Saxena

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गोत गंधो के देवता ! फिर मु संवारतो 1! सकरी सुविधाओं से फिर मुर बुहार लो ! ! गली-गली, चौरहि, नीमो पर भूल रहे ओ मेरे सम्बंधी ! मुझको ही भूल रहे आवारा सज्जनता ! मुभे भी उवारलो जीते से ऊब गया झंगना उतार लो ! गंधों के देवता !




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