भगवंतराय खींची और उनके मंडल के कवि | Bhagvantray Khichi Aur Unke Mandal Ke Kavi

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Bhagvantray Khichi Aur Unke Mandal Ke Kavi by महेंद्र प्रताप सिंह - Mahendra Pratap singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-सूची प्रथम श्रल्याय पृष्ठभूमि द , विपय.प्रवेण - मण्डल शब्द का म्र श्रौर प्रवंव मे इसकी सार्धकता-- साहित्यिक मंडल--राजनीतिक मंडल-राजनीतिक मंडल का विस्तार-- -(वुव्लयंड) सीमा-- वुंदेनखण्ड का भौगोलिक परिचय दोग्राव ्रतर्वेद) का भौगोलिक परिचय निवासी-मंडल की बोलियाँ--मंडल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (ग्रत्तीतकाल से राजनैतिक चेतना का प्रवाह्‌)- मगवंतराय क समय की. रेततिहासिक स्थिति (ग्रौरंगजेव की गासन-नीति श्रौर उसकी प्रतिक्रिया ) -हिंन्दुग्रों में देगव्यापी जाएति--सांस्क्रतिक पृष्ठ भूमि--मसंडल मे मध्य देव की सार्वकालिक मान्यता--भगवंतराय के समय में मध्य देग की मान्यता के प्रति जागरूकता--मध्यदेग महाकाव्यों श्रौर महापुरुषों का लीला- स्थल रहा है--सामाजिक स्थितति--गाँव श्रौर नगर में दूरी --भगवंत राय ग्राम- संस्कृति के नायक थे--गाँवों का जीवन-स्रोत सूखा नहीं था--घामिक परि- स्थिति--हिन्दू-मुसलमानों में स्वाभाविक तनातनी-- हिन्दुओं में प्रतिक्रिया के चिह्न--वीरभाव की हनुमत उपासना का प्रचार -साहित्यें श्रौर साहित्यकार की परिस्थितियाँ--रीतिकाल की प्रथम शताब्दी दुसरी गताब्दी से उत्करं थी--रीतिकाल का कवि सही मार्ग के लिए छटपटाता रहा (जैसे देव )--राष्ट्रीय जाग्रति का कत्रि ने नेतृत्व किया--प्रकृति--मंडल की प्रकृति, कवि की श्रमुभूति उसको श्रमिव्यव्ति में सहायक है--संगीत--सगीत की परम्परा--मुस्लिम संसग की संगीत-क्षेत्र में प्रतिक्रिया --संगीत-श्षेत्र की तीन पेटियाँ । ह्विंतोय श्रच्याय (भगयंतराय का चंश्ञ-परिचय श्रौर जीवनी) ४५--७४ वम-परिचय--खीची, चोहानो की एक भखा--भगवंतराय के पूर्वजे गागरोण राजवंश के थे--गजसिह ने श्रसोथर बंध की नींव डाली--भगवंत राय के पूर्वजों का वृत्त--भगवंत राय की जीवनी--जन्मकाल का श्रनुमान--पिता की आर्थिक स्थिति--प्रारम्भिक संभावनाएँं--घिक्षा-दी क्षा--प्रामाणिक जीवनी --




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