भारतकी खुराककी समस्या | Bharat Ki Khurak Ki Samasya

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : भारतकी खुराककी समस्या  - Bharat Ki Khurak Ki Samasya
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

Add Infomation AboutMohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
४ तंगीके जमानेमें [पिछली लड़ाऔके दौरानमें जब भारतमें खाद्य-पदार्थोकी तंगी फंली हुआ थी, अुस समय गांधीजीने अपने देशवासियोंको निम्न-लिखितसलाह दी थी । देशकी वर्तमान स्थितिको देखते हु आज भी असका .महत्व हैः जिसे अभी भी जरूरतका लाखों टन खाद्यान्न आयात करना पड़ रहा दहै।] ल्‍..... कहावत है कि जो जितना बचाता है, वह अतना ही कमाता यापदा करता है। जिसलिजे जिन्हें गरीबों पर दया है, जो अनके साथअंक्य साधना चाहते हैं, अुन्हें अपनी आवश्यकतायें कम करनी चाहिये ।यह्‌ हम कओ तरीकोंसे कर सकते हैं। मैं अनमें से कुछ ही का यहांजिक्र करूंगा ।- धनिक वर्गंमें प्रमाण या आवश्यकतासे कहीं ज्यादा खाना खायाओर जाया किया जाता है। अेक समयमें अेक ही अनाज जिस्तेमालकरना चाहिये । चपाती, दाल-भात, दूध-घी, गड़ और तेल ये खाद्य-पदार्थ शाक-तरकारी और फलके अपरांत आम तौर पर हमारे घरोंमें जिस्ते-माल. किये जाते हैं। आरोग्यकी दृष्टिसे यह मेल ठीक. नहीं है।जिन खोगोको दूध, पनीर, अंडे या मांसके रूपमें स्नायूवर्धंक तत्त्व मिल जाते हूँ, अुन्हें दालकी बिलकुल जरूरत नहीं रहती ! गरीब लोगोंकोतो सिफं वनस्पति द्वारा ही स्नायुवर्धक तत्तव मिक सक्ते है । अगरधनिक वगं दा और तेल लेना छोड़ दे, तो गरीबोंको जीवन-निर्वाहके किअं ये आवद्यक पदाथं मिलने लगें । जिन बेंचारोंको न. तो प्राणियोंके_ दारीरसे पंदा हुअ स्नायुवधंक तत्त्व मिलते हैं और न चिकनाओ ही। अन्नको दलियाकी तरह मुलायम बनाकर. कभी नहीं खाना चाहिये ।. अगर असको किसी रसीी या तरल चीजमें इबोये बगैर सूखा ही १६--------------------- न्य --------~------------------ ----




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now