डॉ॰ धर्मवीर भारती और हिन्दी पत्रकारिता | Dr. Dharmaveer Bharati Aur Hindi Patrakarita

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
शेयर जरूर करें
Dr. Dharmaveer Bharati Aur Hindi Patrakarita by देवेश कुमार - Devesh Kumar

एक विचार :

एक विचार :

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

देवेश कुमार - Devesh Kumar के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | जानकारी जोड़ें |

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(देखने के लिए क्लिक करें | click to expand)
। र ~ मामासकी । जिस व्यवस्था के विरुद्ध हम संघर्षरत थे हमें उसी व्यवस्था को तिनके कीतरह ग्रहण करना पड़ा | जब राष्ट्रीय परिदृश्य इतना उथल-पुथल भरा था, तब भारती प्रेम कीकोमल-कांत पदावली में आकंठ डूबे हुए थे । उनकी कालजयी कृति “गुनाहोंका देवता सन्‌ 1949 में ही प्रकाशित हुई थी । सन्‌ 1950 में भारती प्रयाग || विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक हो गए । अभी वे पूरे 25 वर्ष के भी.नहीं हुए थे । यानी घोर युवावस्था में ही वे युवाओं के गुरु बन गए । “गुनाहों का देवता' उन दिनों कॉलेज में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का सबसे प्रियग्रंथ था । इसी कारण वे जल्दी ही प्रयाग विश्वविद्यालय के सबसे लोकप्रिय || प्राध्यापक बन गए । देश उन दिनो अपने संक्रमणकाल मे था । हर प्रबुद्ध नागरिक यह अनुभव [ध| कर रहा था कि उसे देश के नवनिमणि मे अपना योगदान देना चाहिये । इसी `| अनुभूति ने भारती को भी इलाहाबाद की विश्वविद्यालयेत्तर गतिविधियों मे | (४ सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया । परिमल जैसी साहित्यिक संस्था केहै गठन का विचार इसी प्रेरणा से उत्पन्न हुआ । उन दिनों 'परिमल' को 1 काइलाहाबाद की धड़कन माना जाता था | सामाजिक सरोकारों से जीवन्त जुड़ाव |... £ | रखने वाले उनके लेखन का सिलसिला निरन्तर जारी रहा । अध्यापन सेज्यादा | | | आनन्द उन्हे पत्रकारिता मेः आने लगा था । इसी की परिणिति ने उन्हें धर्मयुग ` | पे 4| तक पहुंचाया ॥




User Reviews

अभी इस पुस्तक का कोई भी Review उपलब्ध नहीं है | कृपया अपना Review दें |

अपना Review देने के लिए लॉग इन करें |
आप फेसबुक, गूगल प्लस अथवा ट्विटर के साथ लॉग इन कर सकते हैं | लॉग इन करने के लिए निम्न में से किसी भी आइकॉन पर क्लिक करें :