आत्मचरित -चम्पू | Atmacharit - Champu
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
61 MB
कुल पष्ठ :
191
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)यंहाँ राज्य का एक अस्पताल है जिसमें दो अतिस्टेंद “सर्जन; एक `
यूरोपियन लेडी-डाक्टर तथा अनेक कम्पाउंडर आदि कमचारीर्दै। शी @
ययँ गरीव रोगियों को दवा, भोजन, ओर रहने के स्थान दिये जाते द| ४ { 1
आजकल नवीन महाराज की ओर से जनाना-अस्यताल बड़े खच॑के `
. साथ वन रद्य है । यहाँ एक बड़ा पोस्टआाफिस, स्युनिसिपैलिटी-आफिस = = `
ओर रेलवे-स्टेशन { इमरार्वे ) तथा पुलिख-स्टेशन ( थाना ) है ।
यह एक छोटा-सा. सुन्दर नगर है. जिसके चारों ओर सुहावने
बन, पुष्पोद्याव, बगीचे श्र दर्शनीय बड़े-बड़े मैदान हैं । बगीचों में.
बड़ा बाग, राजेश्वरजी का बाग, काकीजी का बाग और बावन-बिगंदा
्रशंखाके योग्य हैं। महाराज के किले से गोलावाजार होती हुईं
स्टेशन तक एक सड़क गईं है जो यहाँ का प्रधान राजमार्ग है । चौकं
पर तथा गोले में अनेक दूकानें हैं जिनमें वख्र, भुषण, अन्न, सब्जी,
मलदां श्ादि सभी आवश्यक पदाथ मिलते हैं ।
.... यहाँ चार अंग्रेजी दवाखाने हैं। आयुर्वेद-पंचानन पैं० भीमसेने ` ॐ |
. मिश्र राजवेद्य तथा पं० शिवप्रसादजी के आयुर्वेदीय औषधालय भी है। नर | .
यक्ष सोमवार तथा इस्पतिवार को खास तौर से बाजार लगता... |
है जिसमें दिद्ातों के लोग अझपनी-झपनी अनेक प्रकार की वस्तुएं बेचने. ` 0 |
........ श्र खरीदने के लिये आते हैं। पा
यहाँ के राजा लोग “परमार” चत्रिय हैं । बहुत दिनों तक उनके. 4
4 किया; इषलिये ये लोग “उज्जैन” कहलाते हैं । पर स्मरण रदे कि उज्जैन द न
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