भारतीय शासन और राजनीति | Indian Government And Politics

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Indian Government And Politics by पी० शरण - P. Sharan

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about पी० शरण - P. Sharan

Add Infomation AboutP. Sharan

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
रेतिहासिक भूमिका { € परिपद्‌ ((0४ण्णा ० 51816} कहा गया जिसके कुल ६० सदस्यो मे से ३३ चुने हये हौतेथे। प्रात्तोमें दैव शासनप्रणाली (फगन) जारी की गई थी । उसके भ्रनुसार प्रातीय विषयो मेँ से कुछ को श्रारक्षित (6ऽ6४६द) बनाया गया, जिसका गासन गवनंर श्रपनी कार्यकारिणी परिपद्‌ के सदस्यों (९५९८४१४८ (८०पान1।07७) की सहायता से करते थे । नेप विपय हस्तांतरित (77805116) कहूलाये, जिनका झासन गवनं र जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों में से छाटे गये मधियों के परामर्थ से करते थे । द्ँध गासन प्रणाली के लिये यह श्रावश्यक था कि केन्द्रीय सरकार के नियस्त्रण को ढीला किया जाय, उसे किसी भी रूप में संघवाद जारी करनान समभा गया। परन्तु यह्‌ केवल मात्र विकेन्द्रीकरण॒ से कु श्रधिक था, उत्ते न्यागमन कहा गया ।* वह शासनप्रणाली वडी दोपपूर्ण थी, इसलिये, वह कार्य-रूप में श्रसफल सिद्ध हुई । सन्‌ १६१६ से लेकर १९३५ तक-सन्‌ १६१६ में अमृतसर में जलियावाला वाग की श्रत्यन्त दुखद घटना हुई । युद्ध के बाद तुर्की पर श्रसम्मानपु्ण सन्धि लादी गई, जिससे क्षुब्ध होकर भारतीय मुसलमानों की श्रोर से “खिलाफत श्रान्दोलन' चलाया गया । काग्रेस ने महात्मा गाथधी के नेतृत्व के अन्तर्गत १९२१-२२ में श्रसहयोग श्रान्दोलन (००-९०-00613110 04 ०९6६) चलाया श्रौर वाद मे काग्रेसी नेताश्रो ने कौसिलों में भाग लेनेके लिये स्वराज्य दल संगठित किया । विभिन्न स्थानों पर हिन्दू-मुस्लिम दंगे हये ग्रौर ्रापसी वैमनस्य वडा । सन्‌ १६२८ मे साइमन कमीशन नये सुधारोके विपयमे रिपोटं देने के लिये भारत श्राया जिसका सब जगह विरोध हुम्रा । काग्रेस की शोर से एक सर्वदल सम्मेलन बुलाया गया, जिसके फलस्वरूप नेहरू रिपोर्ट बनी । नेहरू रिपोर्ट की सिफारिशों को ब्रिटिश सरकारने स्वीकार नहीं किया । इसलिये कांग्रेस ने लाहौर में हुए १९२८ के श्रधिवेशन पर पूर्ण स्वतत्रता प्राप्त करने का ध्येय श्रपनाया । इस हेतु मार्च सन्‌ १६२६ से नेकर सन्‌ १६३४ तक सविनय श्रवक्षा श्रान्दोलन (लं 5०ए८्पाला ० कव ०्लला।) चला । यह्‌ आान्दोदन कुछ महीनो के लिये गांधी-इरविन समौते के फलस्वरूप वीच मे बन्द रहा । मन्‌ १६३० से लेकर १६३२ तक्र लदन मे गोलमेज सम्मेलन (२०४०५ 74016 @०ग- ८ा९य८८) की तीन वार वैठकें हुई , जिनमे भारत के भावी सविधाने की समस्या „= 1 शािऽ दता वलात्‌ 1० त्वषष्ठे ठया 9 7086 ० शवणऽलिाल्व' ऽप्णिव्लाइ इणाधब0िड छिह धो एड पड 1 फाणंडलाड उत्पा 3 णि ४0 लल्लल्व एणा ० [दज एणा, १ एवाञपत्ल त ८८८४९ 5०४८०४४ एलण६.।र॥ [प १76 वपत क णील315 पावला पड 0०४ढा005- उिपा 1175 ऽतााठ त (तकाल पल्वपप्त्तं 2 एलाप्पपदार एथ >21109 9 ०0०00. 0४ (६ टटए0031 हठश्टापााल्या, व्रा वला2३110) 48 70 फण्प्र्ठी, 0 85 बाएं जाए पिंड 1्0ठेएट 100 ० द्दि्द्ाञा एप ६४ 116 इ3ा2 १7611 चावड ब५ापेडएपए शाणद ३ 00छीद इटव5०पउण# 06 ८००१९५०१ ४# 106 पलत 0त्तलछ- प्रभा, [€ 3 एप्त कलात्‌ ५३5 वल्श्णपाठण. कणे ककड, र त वल लमशगकटा कव हक्का ९ 72, ¢, ह भर




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now