बिन बुलाया मेहमान एवं अन्य कहानियाँ | Bin Bulaya Mehmaan Evam Anya Kahaniyan

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : बिन बुलाया मेहमान एवं अन्य कहानियाँ  - Bin Bulaya Mehmaan Evam Anya Kahaniyan
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about राधाकृष्णा चौदवाणी - Radhakrishna Chaudhvani

Add Infomation AboutRadhakrishna Chaudhvani

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
मैं चौंक गया था 1“वह यही रहती है । साल भर पहले वह मुझे मिली थी, फिर नहीं मिली है । थीघ में सुना था दह बीमार थी । इसी बहाने हो भाते हैं ।””महल समान घर था दमयन्ती की ससुराल । संगमरमर जड़ा बैठक का बमरा । परिवार के वयोवुद्धो के तैल-चित्र दीवारों पर टगे हुए थे । धरती पर मोटे मोटे गलीचे । घल से सटकते बत्तियों के भाड़-फानूस ।दमयन्ती को देशकर में भाश्चय॑-चकिति सा हो गया । पीला चेहरा, दुबलाया शरीर, निरथंब बु दू ढती भाखे । वह मतंकी के बजाय किसी सम्पन्न घर की बीमार बहू लग रही थी ।*“दमयन्ती, बया सुम स्वस्थ नही हो ?” मैंने पूछादमयन्ती ने मेरी तरफ देखा हमारी भ्रात मिली । उसने मसिं भूका लो भौर सवय को सम्मालने के लिए भन्तू से बातें करने लगी ।दमयन्ती ने उम छोटी सी मेंट के समय मुभ से एक शब्द भी बात सही की । विदा सेते समय वह चादी की थाली मे पान लेकर मेरे सामने भा खड़ी हुई । मैंने देखा वह मेरे चेहरे में धूर रही थी । मैं मुह फेर कर भन्तू के पीछे घलने लगा ।पीछे से भावाजू भायी- सुन्दरदा ।”मैं मुहर खड़ा रहादमयन्ती ने मेरे पास झाकर कहा-“बुरा मत मानिएगा, सुन्दरदा ।”भौर मैंने देखा उसकी भांसो मे प्रामू तैर रहे ये। फिर उसने भ्रष- स्चरी भावान्‌ मे कटा “व पापरो सदा याद करनी हू ।” प्रर उसने साही के खिसकते पत्लू को ठीक कर सिर पर लिया ।टैगसी में भन्तू ने बहा- “दमयन्तों ने तुम से दात नहीं बी, पर मुझ से तुम्हारे विपय मे सव वृद्ध शृद्धा ॥29




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now