योगशास्त्र पे विचार | Yogshastra Pe Vichar
श्रेणी : स्वास्थ्य / Health

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Add Infomation AboutMaharaj Sahab Shree Chatursingh Ji
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
231
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(११)(प्राणायाम रहस्य)भिर 2 सिकभ्वास प्रश्वास शू दन्दियां येते श्रर्थात् इन्द्रियां ने कषान ष्टेवे
ने इन्द्रियों ने ज्ञान ब्देवा दूर सन यरो । फ्यूँ के इन्द्रियां ये
कद मद गरणेटो खावा रे नाम हीज़ मन है। मन शु श्राखो
संसार वरी श्रर्थात् निश्चय ब्देवे; निश्चय शूँ ही संसार है ।
पादयो शरवो चालवः शूँ यो मिदे । निश्चय मन में, मन इन्द्रियाँ
में ने इन्द्ियाँ शाँस में, शाँस मठति में मिले जदी शाँस वा
इन्द्रियाँ घा निधय श्रादि कई भी निलाण्श दीख जाय । जदी'ज
सब छूट मुक्ति ब्हे” जाय है; ने ईं रो उपाय, शाँस में निश्चय
शु मन ने मिलावणी है। यो, मायायाम,करवा शुं ष्टे दै।
प्राणायाम री विधि योगदर्शन वा भाष्य में देरी ।
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