रत्नकरण्डश्रावकाचार | Ratnakarandshravakachar

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
294
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पाठकोंसे अनुरोध ।
[1
१- यद यग्न्त धावकायार श्रन्थ आपके समक्ष बिराञअपरान
ह । समे दृष्टिदोष, संशोधनक्ो भूक, प्रेसकी भसावधानी पर्वं
भक्कागता मादि कारणोसे मशुद्धि रह जाना सम्भव है भतपव
विह पाठक शुद कर पद् पद वे मौर सुनावे ।
२-प्रभाचन्द्रोय संस्कृत टोक', नियक्ति और रिप्पणोके
पो ब वर्णो को शुदता--मशुदता परस्पर ( पको दूखरेसे )
ज्ञान कर शुद्धताकों श्रदण कर वाक्याथ करें ।
३ - ओ पष, वाक्व तथा नका अथं अपने अनि हुए अ्थेसे
विलक्षण अचे उत्को सस्त श्रोप्रभाचश््रीय रोकासे शोत
करना | फिर भो सन्तोष नहीं होवे तो अन्य भाषं संख्छत-प्राङृत
भ्रन्धोसे पिन्ाकर भविरोधो बमनेका प्रयज करे ।
आशा है श्रतार्थों, शिक्षक भीर विद्यार्थीगण दोषप्राहो न
बनेगे किन्तु हंसके सपान दोष विवेको गुणग्राहकः वनेगे ।
यदि धार्मिक बन्धुवर्गो ने इस भ्रन्धसे लोम उठाया तो
अपना प्रयास सफल समझे गे ।
--प्रकाशक
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