जीवनी जवाहर लाल नेहरू | Jeevani Jawahar Lal Nehru

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jeevani Jawahar Lal Nehru by नरेंद्र भार्गव

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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भाग्य के साथ मिलन ९ श्रायिक, राजनीतिक ग्रौर सामाजिकं समस्वाग्रों पर्‌ स्वभाव के झ्रनुसार भी उनके न्त्र में दोनों श्रादमियों के वीच एक खाई थी । लेकिन सामान्य उद्देश्य के छिए दोनों ने साई: को पाट लिया । नेहरू नें जिन कारणों से महात्माजी का श्नुसरण किया, वे श्रपने आप में ग्रनिरुद्ध झौर अस्पप्ट होने पर भी उनकी विशिप्टता के विरोधाभास का सुराग देन हैं। ऐसे भी क्षण थे जवकि वे उलझन में पड़ जाते थे कि मार्ग निदेशन सही है या नहीं । कभी-कभी वे श्रान्त ब्रौर उत्साहहीन हो जाते । लेकिन सर्दव अन्त में महात्माजी उन्हें चुम्यक की तरह खींच लेते । जवाहरलाल को जिस वात नें सबसे श्रविक प्रभावित किया वह यह था कि गुलामी का वन्या मिटाने में गांवीजी डर का घव्वा भी मिटाये दे रहे हैं । नेहरू ने सदैव साहस की सराहन। की हू । विद्रोही गांवी नें उन्हें आकृप्ट किया । महात्माजी ने कहा था कि साहस चरित्र की दुढ़ नींव है । साहस के बिना न नैतिकता, न धर्म श्रीर न प्रेम रहता है । कायरता छुतह्टी वीमारी है । इसी वात का उनके पहले की महान्‌ श्रात्मात्रों ने उपदेश दिया था : “भय मृत्यु है, विश्वास जीवन है।”” इस गुण का दूसरों में संचार करने की भी गांधीजी में प्रतिभा थी । उन्होंने भारत को दिखा दिया कि डर को किस तरह दूर किया जाय । उन्होंने भारत के लोगों को, विशेष रूप से जनता को, गर्व श्रीर रीढ़ का एक नया श्रर्थ दिया । उन्होंने उनको तनकर चलना सिखाया । उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति ने श्रपने लोगों के दिल श्रौर दिमाग़ के श्रन्दर बिना भूल चूक देखने में समर्थ किया 1 चरित्र की विशिप्टता के अनुसार नेहरू ने महात्माजी के उन विचारों पर तकं- वितकं किया जिन्हें वे न मान सके । यह ध्यान देने योग्य है कि वहुत वातों में उनका मन उनकी श्रात्मा को समझा लेता है। इस तरह से यद्यपि वे श्रहिसा के सिद्धान्त को पूरी तौर पर न मान सके, उन्होंने उसे भारतीय परिस्थितियों के लिए सही नीति मान लिया । नेहरू तर्क करते हैं, “एक उचित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उचित साधन होन। ही चाहिए।” यद सदाचार का भ्रच्छा सिद्धान्त ही नहीं लगा ग्रपितुं स्वस्थ क्रियात्मत राजनीति र्गी, क्योकि जो साघन ग्रच्छ नहीं रहते वे श्य प्राप्ति मे श्रसमफल होते हँ ्रौर नई कविनादूर्या श्रीर्‌ समस्याएं खड़ी कर देते है । वड़ी-वड़ी वातो के श्रनुमरण श्रीर्‌ उनमें श्रास्था के लिए नेहरू अपने कुछ वहुत्त ही प्रिय विश्वासो को पृष्ठभूमि में रखने को तयार दँ । छेकिन फिर, चारित्रिकं विशिष्टता के श्रनुरूप वे उनका त्याग नहीं कर देते हैं। चंचलता श्रौर श्रस्थिरता के रूप में नेहरू के चरित के समान कुछ ही चरित कम उपयुक्त होंगे । नेहरू को श्रगर किसी चीज का पता था तो अपने दिमाग का । वरसों तक उन्होंने सोचा, पढ़ा श्रौर मनन किया हैं श्रीर ज्यादातर वातों पर वे निश्चित परिणामों पर पहुँचे हैं । वास्तव में उनके कार्य, लेख श्रौर भाषण, उनके प्रधान मंत्री होने के बहुत पहले ही भविष्य को स्पप्ट रूप से रख देते हैं।




User Reviews

  • dpagrawal24

    at 2020-05-24 03:35:02
    Rated : 8 out of 10 stars.
    "लेखक का नाम ठीक कीजिए. "
    जवाहर लाल नेहरू की जीवनी - इस किताब के लेखक नरेंद्र भार्गव नहीं, फ्रैंक मोरेस हैं. कृपया जानकारी सुधार दें.
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