भारत में गाय | Bharat Me Gaay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विस्तृत सूची 1 स्परमे गो-चध २५ श्रामोद्योगका पुनुरुद्धार--सुधारका उपाय २६, जमीनका उपजाऊपन बढ़ाना २७, --तेछदनकी रफननी रोककर २९, --गोवरकी रक्षा करके ३०-३३, डा० भोवेलकर और शाही कमोदानके प्रस्ताव परस्पर विरोधी ३४. य क भारते मायकी कुछ सुख्य नस्टे : (षय २५--८४) भारतीय ढोरोंका मूल ३५-३६; नस्लकि ६ प्रकार ३७-३८, मैसुर-प्रकार ४०, अश्टनमदाछ ४०-४१, होकर ४२, कगायमू ४२, लिद्धारो ४४, करप्णामेलौ ४५, यरगुर ४६, आकमव,दी ४७ गीर प्रकार ४८, गीर ४९-५०, देवनी ६१ डगी ५२, मेवानी ५३, निमाङञो ५४, सफेद्‌-भूरा प्रकार ५५, ककिरेज ५६, माख्वी ५७, नागौरौ ५८, यार्परकर ५९, वीर ६०, वार ६१, छाटे सीगवाला श्रफार ६२, भगनारी ६३, गावृाव ६४, हरियाना ६५, हासौ हिषार्‌ ६९१ अगाक ६७, राठ ६८, सकर-परकार : केवारिया ६९, खेरीगद़ ७०, सादीवाल प्रर ७१, सादीवार ७२, त्क सिन्धी ७३, धन्नी ७४, पदाड़ो प्रकार ७५, सीर ७६, छोदानी ७७, नका वर्गीकरण ७८-८४, डे द्विश्रयोजन गाय : (वैरा ८५--१०८) सरकारी प्ठ-सवर्भेन नीति ८५-८७, शाही कमी ओर द्वि-प्रयोजन गाय ८८-९४, साधारण उपयोगिता ओर दि-पयोजन ९५-१०५. प्रतिं दकौ खत १०६, आगेका छाम १०७-८. (; गाय बनाम ससं : (पैसा १०६--१२७) शादी कमीशन भर भेंस १०९-१५९, गायही पतटी जाय १२९०-९३, याय बनाम मैंस पर गाधीजी १९२४-२७, ण संवर्धन आर श्रजनन-शाख : (पेय १२८-- १७३) ढोर-संवर्धनकी समस्यायें १९८, सर आर्थर ऑल्यर और उनका काम 1१९९-३०, डेशी-विदेशी सकर--एक असफठता १३१-३४ संवर्धनमें प्रजनन-शात्र १३५, ढोर-




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