महाभारत भाषा शांति पर्व | Mahabharat Bhasha
श्रेणी : पौराणिक / Mythological

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
94 MB
कुल पष्ठ :
1000
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)शल््तिपव्य भाषा का सचीपत्र । १५अध्याय विपय पृष्ठ से पृष्ठ तक८१८३ |भीष्मजीका युधिष्ठिर से व्यासके कहेहुये चेतन्यआत्माकी उर्पा
सूप आकाशादि के विचारको वणन करना, ४९५ | ४९८
८9 का भीष्पर्जास प्रश्नकरना कि मृत्युकिसकी है ओर किस
पुरुष से उत्पन्न हुई व किसकारण से संसार को मारती है वभीष्मजीका उत्तर देना, ४९८ | ४९९
८४ |सबजीबों को दुःखी देखकर शिवजीका ब्रह्माजी के पास जाकर
प्रार्थना करना, ४९९ | ४००
श्र८५ | मृ्युका स्ीरूप दाकर त्रह्लाजी के पासजाना व सब मनुष्यों के
मारने कों अस्वीकार करना अर फिर पृत्युका तप करनावर्णन) | ५०० | ५०९८८ य्रधिष्ठिरका भीष्पजीसे धर्मके विषय में पूछना, ४०२ | ০২
८७ याधाष्ठरका भीष्मजंस तलाका हाल एछना, ४०४ | ५०६
<< |भीप्मजीका यधिष्ठिर से तुलाधार व जानली ब्राह्मणका इतिहासवन करना, ४०६ | ५०्द
८९ |जाजली बाह्मण व तुलाधारका प्रश्नोत्तर व०, ५०८ | ५१९
८० |जाजली वाह्मण से तुलाधार वेश्यका हिसात्मकयज्ञ व यज्ञका ह-ततांत कहना, ५११ | ५१४
५१ |जाजनली से तुलाधारका हिन्पाकी निन््दा व श्रद्धा अभ्रद्धाका बृचांतकहना; ५१४ | ५१६, ९> | भीष्मजीका दिन्पात्मक्र धर्मकीं निन्दा करना “ “५१६ ४१७९३ (युक्िप्तिरक्ों भीष्यजीसे योग्यकर्मकी परीक्षाशीघ्र व॑ विलम्ब किस৬हारकरे पछना और भीष्मनीको चिरक्रारी ब्र,हझमणका इति-“४ „>| हास कहना) ४१७ | ४२१
९४ मीष्मजीकों सधिष्ठिरके हिन्साधम अधर्म के प्रश्नमें द्यमत्सेन वराजा सत्यवानका इतिहास कहना, ५२१ | ५२३
९५ | युधिष्ठिर कारभःष्मजीसे गरदस्यधय रौर योगधर्मं इनमे कौन क-
स्याणदायक ये भशन करना गोर मीष्मजीको कपिलनी व गौकासम्बाद् कहना, ५२३ | ५२६९६ |कपिलजी स्यप्रश्मनीका आश्रमों के विषय मे प्रश्नोत्तर वर्णन, | ५२६ | ५३१९७ | स्युमरश्मक्रा कपिलिमुनिसे ब्रह्ममार्गके विषय में प्रश्ककरना वो उनका उत्तर देना, १३१ | ४३४
९८ भीष्मर्जीका युधिष्ठरसे कुणडधारनाम मेघको अपने भक्तकरा उप- |
कार करना वणन, ५३४ | ५३६
९९ | भीप्पजीका यथिष्ठिर से दिन्धायुक्त यज्ञी जिन्दा करन ५३७ | ५१८
१० °| भरीण्पजीका युधिष्ठिरस पाप व धर्म व मोक्ष व चेराग्य का वर्णन
करना, १३५८ | ५३९
१ भीषप्मनीका सधिपष्ठिर से योग आचार का वणन करना ४३९ | ४४०भीप्मनीकायुधिप्टिरसंना रद व आसतदेवलका सम्पादवणशनकरना, | १४१ | १४१
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